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कुली बेगार आंदोलन की शताब्दी वर्षगांठ पर हुई गोष्ठी

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अल्मोड़ा। एसएसजे परिसर अल्मोड़ा में सोमवार को कुली बेगार की शताब्दी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में गोष्ठी का आयोजन किया गया। बतौर मुख्य अतिथि एसएसजे विवि के कुलपति प्रो. एनएस भंडारी ने कुली बेगार पर प्रकाश डाला। आंदोलन से जुड़े स्व. बद्री दत्त पांडे के नवासे कर्नल रवि पांडे ने भी कई महत्वपूर्ण जानकारी दी। एसएसजे परिसर अल्मोड़ा के इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व विभाग में आयोजित गोष्ठी में मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. भंडारी ने कहा कि कुली बेगार आंदोलन रक्तहीन क्रांति के रूप में जाना जाता है। कुली बेगार आंदोलनों ने कुरीतियों पर प्रहार किया है।
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कहा कि बद्रीदत्त पांडे के परिवार के सदस्यों का इस गोष्ठी में शामिल होना प्रशंसनीय है। 1900 के दौर के आंदोलन ने समाज के हितों की परवाह की और उन समस्याओं को दूर करने के लिए एकजुटता दिखाई। इन सामाजिक आंदोलनों में कुली बेगार प्रमुख है। विशिष्ट अतिथि स्व. बद्री दत्त पांडे के नवासे कर्नल रवि पांडे ने कहा कि उत्तरायणी मेले में रजिस्टर को बहाया जाना बहुत बड़ी घटना थी।
सुधीर पांडे, मृदुला जोशी, सुशील जोशी, वसुधा पंत, प्रो. विद्याधर सिंह नेगी, प्रो. अनिल जोशी आदि ने भी व्याख्यान दिए। वक्ताओं ने कहा कि कुली बेगार आंदोलन से जुड़ने के लिए कई महान हस्तियां बागेश्वर के सरयू बगड़ पहुंचीं। कार्यक्रम संयोजक इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व विभागाध्यक्ष प्रो. वीडीएस नेगी ने कहा कि कुली बेगार आंदोलन के कारण कुमाऊं का नाम विश्वपटल जाना जाता है। इस मौके पर प्रो. एसए हामिद, डॉ. चंद्र प्रकाश फुलोरिया, डॉ. कपिलेश भोज, डॉ. वसुधा पंत, गिरीश मलहोत्रा, प्रेमा बिष्ट, किरन तिवारी आदि मौजूद रहे।
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