अल्मोड़ा। इस बार कोरोना संक्रमण ग्रामीण इलाकों को भी अपनी चपेट में ले रहा है। कुमाऊं के पर्वतीय जिले भी इससे अछूते नहीं हैं। यहां पर भी कोरोना के मामले में बढ़ते जा रहे हैं।
कुमाऊं के चार पर्वतीय जिलों में सबसे ज्यादा चंपावत जिले के गांव कोरोना की चपेट में हैं। इसके बाद अल्मोड़ा जिले का नंबर आता है।
इस बार प्रवासियों के लिए कोई सख्त नियम न होने की वजह से कोरोना संक्रमण गांवों तक आसानी पहुंच गया। कई गांवों में 40 से 50 लोगों के टेस्ट कराने में सभी की रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग किसी गांव में ज्यादा कोरोना मरीज मिलने के बाद उस गांव को माइक्रो कंटेनमेंट जोन (एमसीजेड) बना रहा है। गांव की सीमाओं को सील किया जा रहा है और वहां किसी भी तरह की आवाजाही को बंद किया जा रहा है।
कुमाऊं के पर्वतीय जिलों में से एक चंपावत के गांव कोरोना की सबसे ज्यादा चपेट में आ चुके हैं, जबकि क्षेत्रफल और आबादी की दृष्टि से यह जिला अन्य जिलों की अपेक्षा छोटा है।
यहां सबसे ज्यादा 34 एमसीजेड हैं, जबकि इस जिले की आबादी करीब दो लाख है। इसके बाद अल्मोड़ा जिले में कोरोना की वजह से 17 गांवों को एमसीजेड बनाया गया है।
बड़ा जिला होने के बाद भी पिथौरागढ़ में अभी हालात सुधरे हैं। यहां पर अभी नौ गांवों को ही एमसीजेड बनाया गया है। वहीं, बागेश्वर जिले में अभी तीन गांव ही माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाए गए हैं।
कुमाऊं के पहाड़ी जिलों का हाल
चंपावत- यहां टनकपुर में 15, चंपावत में 12, लोहाघाट में चार, बाराकोट में दो और पाटी में एक कंटेनमेंट जोन है।
अल्मोड़ा- जिले में स्याल्दे में चार, भनोली में तीन, सोमेश्वर में दो, सल्ट में दो और भिकियासैंण, अल्मोड़ा, लमगड़ा, चौखुटिया और द्वाराहाट में एक-एक कंटेनमेंट जोन है।
पिथौरागढ़-यहां झूलाघाट, जाखनी, राये, बजेटी, तिलढुकरी, सरकारी आवास भवन, सिरोली में एक-एक कंटेनमेंट जोन हैं। इसके अलावा दो अन्य जगहों पर भी कंटेनमेंट जोन बनाए गए हैं।
बागेश्वर- यहां बागेश्वर में दो और कपकोट में एक कंटेनमेंट जोन है।
(आंकड़े उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी किए गए हैं)