अल्मोड़ा में पत्रकारों से वार्ता करते उलोवा पदाधिकारी।
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अल्मोड़ा। उत्तराखंड लोक वाहिनी ने राज्य में बड़े बांधों के निर्माण का विरोध किया है। आरोप लगाया है कि सरकारें पूंजीपतियों के साथ साठगांठ कर निजी लाभ के लिए उत्तराखंड में बड़े बांध बना रहीं हैं, जो कि आपदा का मुख्य कारण है। इसका ताजा उदाहरण चमोली जिले में जल प्रलय के रूप में सामने आया है। उलोवा ने आरोप लगाया कि सरकार बड़े बांधों का विरोध करने वालों को विकास विरोधी ठहरा रही है।
उलोवा प्रवक्ता दयाकृष्ण कांडपाल, कोषाध्यक्ष जगत रौतेला, उपाध्यक्ष जंग बहादुर थापा, अजय मित्र बिष्ट ने पत्रकार वार्ता में कहा कि सुरंग आधारित बांध हिमालय के पहाड़ों को कमजोर कर रहे हैं और इससे खतरा बढ़ रहा है। इसे तत्कालीन वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने भी स्वीकारा था। उन्होंने कहा कि उलोवा के केंद्रीय अध्यक्ष रहे स्व. डा. शमशेर सिंह बिष्ट के नेतृत्व में गढ़वाल मंडल में बन रहे बड़े बाधों का विरोध किया गया था। उन्होंने कहा कि आपदा और भूकंप की दृष्टि से उत्तराखंड काफी संवेदनशील है। चमोली जिले में जल प्रलय बिना बारिश के आई आपदा है, जो कि मानव जनित आपदा है। बांधों के निर्माण में सरकार वैज्ञानिक और पर्यावरणीय पहलुओं की अनदेखी कर रही है।
उन्होंने कहा कि उलोवा कुमाऊं में बनने वाले पंचेश्वर बांध का पर्यावरणीय खतरों के आधार पर विरोध करती है। सरकार से मांग करती है कि बड़े बांधों के स्थान पर विकल्प के तौर पर छोटे बांधों का निर्माण किया जाना चाहिए। इसमें स्थानीय ग्रामीणों को यूजर्स कंपनी बनाकर जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण हो और लोगों को रोजगार भी मिले। इस मौके पर पार्टी के कुनाल जोशी ने जनकवि स्व. गिरीश तिवारी गिर्दा द्वारा बड़े बांधों के निर्माण पर खतरे की आशंका पर लिखी कविता का पाठ भी किया।