प्रो. शेर सिंह बिष्ट द्वारा लिखे गए महाबली मैद सौन और केसि सौन ग्रंथ का आवरण पृष्ठ।
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अल्मोड़ा। भनोली तहसील अंतर्गत डुंगरा गांव के महाबली माधो सिंह सौन उर्फ मैद सौन और किशन सिंह सौन उर्फ केसि सौन की चंद शासकों को घोर संकट से उबारने में महत्वपूर्ण भूमिका रही। लेकिन चंदकालीन इतिहास में कहीं भी उनकी वीरता, अद्भुत रणनीति कौशल का उल्लेख नहीं मिलता है। स्थानीय इतिहासकारों ने भी इतिहास में इनका जिक्र नहीं किया। इसके चलते ये दोनों महाबली अब तक गुमनाम ही रहे। एसएसजे परिसर अल्मोड़ा से सेवानिवृत्त प्रो. शेर सिंह बिष्ट ने ‘महाबली मैद सौन और केसि सौन’ ग्रंथ में लोक इतिहास को सामने लाकर सराहनीय काम किया है। अब लोग इन दोनों महाबलियों की जीवनगाथा से रुबरू हो सकेंगे।
प्रो. शेर सिंह बिष्ट पिछले 40 सालों से उत्तराखंड के लोक साहित्य और लोकगाथाओं पर काम कर रहे हैं। लोकगाथाओं पर आधारित उनका एक महत्वपूर्ण ग्रंथ ‘महाबली मैद सौन और केसि सौन’ प्रकाशित हुआ है। इसमें कुमाऊं के दो बाहुबली वीरों की जीवन गाथा को पद्यात्मक और गद्यात्मक रूप में हिंदी रूपांतर समेत प्रस्तुत किया है।
प्रो. बिष्ट ने कड़े परिश्रम और लंबे शोध के बाद इन महाबली शूरवीरों की गाथा के माध्यम से तत्कालीन इतिहास, समाज, संस्कृति और भाषा के तमाम अनछुए पहलु उजागर किए हैं। प्रो. बिष्ट की यह पुस्तक शोधार्थियों और लोक
इतिहासकारों के लिए शोध में महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे पूर्व प्रो. बिष्ट की 46 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
मैद सौन ने उदिया झाकुरी के आतंक से छुटकारा दिलाया
अल्मोड़ा। महाबली मैद सौन (माधो सिंह सौन) ने काली कुमाऊं के चंद शासक को उदिया झाकुरी के आतंक से छुटकारा दिलाया। केसि सौन (किशन सिंह सौन) ने राजा कल्याण चंद को परेशान करने वाले हजीर बजीर नामक दो कत्यूरी शूरवीरों को मौत के घाट उतारकर उन्हें चिंता मुक्त किया। केसि सौन ने चंपावत जिले के देवीधुरा में मां बाराही धाम में हुए पत्थर युद्ध (बग्वाल) में महाबली बाज मटियाली को परास्त कर अपनी वीरता के झंड़े गाड़े थे। चंपावत के चंद राजा ने मैद सौन को और अल्मोड़ा के चंद शासक ने केसि सौन को अपना दीवान (मंत्री) बनाया था। उन्हें क्रमश: 36 ज्यूल (इलाके) पुरस्कार स्वरूप दिए थे। उनके वंशजों को भी दीवानचारी देने का वचन दिया था। (संवाद )
महाबली मैद सौन और केसि सौन ग्रंथ के लेखक प्रो. शेर सिंह बिष्ट।- फोटो : ALMORA