कलक्ट्रेट का पुनर्गठन सहित पांच सूत्रीय मांगों को लेकर कलक्ट्रेट मिनिस्टीरियल कर्मचारियों का तीन दिवसीय कार्य बहिष्कार शुरू हो गया है। कार्य बहिष्कार से कलक्ट्रेट स्थित कार्यालयों में कामकाज ठप रहा। कर्मचारियों ने शासन पर कलक्ट्रेट कर्मियों की हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
कलक्ट्रेट स्थित विभिन्न कार्यालयों के मिनिस्टीरियल कर्मचारी बुधवार को कार्य बहिष्कार पर रहे। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि सरकार कलक्ट्रेट मिनिस्टीरियल कर्मचारियों की मांगों की उपेक्षा कर रही है। कलक्ट्रेट के ढांचे के पुनर्गठन की मांग लंबित है। नायब तहसीलदार के पदों पर दस फीसदी पदोन्नति देने का शासनादेश जारी नहीं किया गया है, जबकि 14 दिसंबर 2013 को राज्य मंत्री परिषद ने इस संबंध में निर्णय ले लिया था। कलक्ट्रेट मिनिस्टीरियल कर्मियों की शैक्षिक योग्यता स्नातक कर ग्रेड वेतन 2800 रुपए करने का मामला भी लटका है। मुख्य प्रशासनिक, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के रिक्त पदों पर तत्काल प्रोन्नति देने, नवसृजित तहसीलों में वरिष्ठ सहायक का ग्रेड वेतन 2800 रुपए करने की मांग पर भी शासन निर्णय नहीं ले रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार मात्र आश्वासन दे रही है, पर मांगें पूरी नहीं कर रही है। अध्यक्षता विशन सिंह नेगी ने और संचालन महामंत्री गोविंद सिंह अधिकारी ने किया। वक्ताओं में विजय सिंह कुंजवाल, किशन सिंह लटवाल, महेंद्र सिंह डसीला, रवींद्र तोमर, जगजीवन सिंह बिष्ट, कमलेश अधिकारी, लीला बोरा, मीनाक्षी जोशी, भगवती भाकुनी आदि ने विचार रखे।