फार्मेसिस्ट संवर्ग का पुनर्गठन करने, फार्मेसिस्ट, चीफ फार्मेसिस्ट और फार्मेसी अधिकारी को वाहन भत्ता देने समेत 18 सूत्रीय लंबित मांगें पूरी नहीं होने से नाराज फार्मेसिस्टों ने डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर गुरुवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में नारेबाजी कर धरना दिया। इस मौके पर हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि फार्मेसिस्ट स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ हैं लेकिन सरकार उनकी उपेक्षा कर रही है।
उन्होंने स्वास्थ्य उपकेंद्रों में तैनात फार्मेसिस्टों का स्थानांतरण आदेश जारी करने, 20 दिन का आकस्मिक अवकाश, एक माह का अतिरिक्त वेतन देने, दुर्गम क्षेत्रों में काम कर रहे फार्मेसिस्टों को 1500 रुपए, चीफ फार्मेसिस्टों को दो हजार रुपए दुर्गम भत्ता देने मांग की। उन्होंने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा में ड्यूटी देने वाले फार्मेसिस्टों का 14 लाख रुपए का बीमा कराया जाए। चार धाम यात्रा में ड्यूटी देने वाले फार्मेसिस्टों को 500 रुपए प्रोत्साहन भत्ता मिले।
उन्होंने कहा कि 12 नवंबर 2013 को स्वास्थ्य निदेशालय ने मांगों पर एक पखवाड़े में शासनादेश जारी करने की बात कही गई थी लेकिन आज तक शासनादेश जारी नहीं किया गया है। इससे फार्मेसिस्टों में रोष है। मांगें शीघ्र पूरी नहीं हुई तो संगठन आंदोलन तेज करने को बाध्य होगा। अध्यक्षता जिलाध्यक्ष गोकुल सिंह मेहता और संचालन मंत्री डीके जोशी ने किया। प्रदर्शन में वालों में प्रांतीय महामंत्री सीएस महरा, संगठन मंत्री गजेंद्र पाठक, जिला प्रवक्ता आरएस भोज, आनंद पाटनी, मनोहर मेहता, प्यारे लाल, आरपी भट्ट, राजकुमार, बीबी जोशी, आईके आर्या, सोनू पाठक, पवन जोशी, केसी पपनै, महेश पुजारी, जेआर आर्या, जीएस बिष्ट, आईएल वर्मा आदि ने भाग लिया।