मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा है कि प्राचीन पांडुलिपियां, ग्रंथ, पुराण, परंपरागत वाद्ययंत्र, लोक संस्कृति की धरोहरें हैं। इनके संरक्षण को सरकार गंभीर है।
उन्होंने कहा कि इन धरोहरों के संरक्षण को कुमाऊं और गढ़वाल विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम चलाने और संग्रहालय स्थापित करने के निर्देश दिए जाएंगे। रावत इंटर कालेज चितई के समीप उत्तरांचल लोक कला ट्रस्ट चितई के संग्रहालय का निरीक्षण करने के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे।\
उन्होंने कहा कि रंगकर्मी जुगल किशोर पेटशाली द्वारा स्वयं के प्रयासों से स्थापित किया गया संग्रहालय लोक संस्कृति के संरक्षण का सराहनीय कदम है। उन्होंने संस्कृति विभाग को जुगल किशोर पेटशाली की साझीदारी में संग्रहालय का संचालन करने के निर्देश दिए।
सीएम ने कहा कि कुमाऊं और गढ़वाल विश्वविद्यालयों में लोक संस्कृति को पाठ्यक्रम में शामिल करने और धरोहरों के संरक्षण को संग्रहालय स्थापित करने को कहा जाएगा। इससे पहले उन्होंने चितई गांव जाकर बिच्छू घास, तुलसी, किल्मोड़ा, गैंदा आदि स्थानीय उत्पादों से सामग्री तैयार करने वाली एसओएस फैक्ट्री का निरीक्षण किया।
इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, संसदीय सचिव मनोज तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष पार्वती महरा, राजेंद्र बाराकोटी, बिट्टू कर्नाटक, सिकंदर पवार, पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा, अमरनाथ रावत, डीएम सविन बंसल, सीडीओ प्रकाश चंद्र, एडीएम ईला गिरी, एसपी एनएस नपलच्याल, एसडीएम रिंकू बिष्ट, अनिल चन्याल, एपी बाजपेयी, सीओ कांति बल्लभ आदि मौजूद थे।