मोदी सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) के सदस्यों ने यहां गांधी पार्क में धरना दिया और जनसभा की। वक्ताओं ने केंद्र सरकार पर मजदूर विरोधी नीति अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सभी सामरिक महत्व के सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण कर रही है, जो कि देश और मजदूरों के हितों के खिलाफ है।
वक्ताओं ने कहा कि मजदूरों की मांगों को लेकर देश में किए गए आंदोलनों की सरकारें लगातार अनदेखी कर रही हैं। सभी सामरिक महत्व के सार्वजनिक क्षेत्रों के उद्यमों रक्षा उत्पादन, बैंक, बीमा, रेलवे, जन सड़क परिवहन, तेल उद्योगों में विनिवेश और निजीकरण को सरकार बढ़ावा दे रही है। उत्तराखंड राज्य में भी मजदूरों की स्थिति खराब होते जा रही है। पीटीसी अंशकालिक चौकीदारों की मांगों पर राज्य सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। ढाई दशक से जल संस्थान में कार्यरत पीटीसी मजदूरों की भी सरकार सुध नहीं ले रही है, जबकि यह कार्मिक ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं के रखरखाव, राजस्व वसूली, पानी आपूर्ति आदि कार्य लगातार करते आ रहे हैं, पर इनका भविष्य अनिश्चित है।
उन्होंने श्रमिकों और मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन लागू करने, नियमितीकरण करने, यात्रा भत्ता, न्यायालय के निर्णय के अनुसार भविष्य निधि काटने, सेवानिवृत्ति के पश्चात प्रतिमाह तीन हजार पेंशन देने आदि मांगें पूरी करने की मांग की। मांगों को लेकर प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी भी की। बाद में मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेजा गया। धरने पर महेश चंद्र भट्ट, भुवन चंद्र बहुगुणा, दिनेश पांडे, शोबन सिंह, किशन सिंह भंडारी, प्रताप सिंह, कृष्ण राम, गोपाल दत्त, आनंद सिंह, जीत सिंह, दलीप सिंह, प्रताप राम, तुला सिंह, नंदन सिंह, मोहन सिंह, पूरन चंद्र भट्ट, शिवराज सिंह, विशन दत्त जोशी, पूरन चंद्र भट्ट, मोहन सिंह मेहता, इंदर सिंह देवड़ी, आनंद सिंह, गोपाल सिंह, विशन सिंह आदि ने भाग लिया।