मंचों से खेल प्रतिभाओं को निखारने की नसीहत और धरातल पर प्रशिक्षण शिविरों के लिए बजट का रोना। यही हाल है खेलों में अल्मोड़ा जिले का। जिला खेल विभाग ने अल्मोड़ा स्टेडियम को छोड़कर शेष जिले में दो माह पहले ही खेल प्रशिक्षण शिविरों को बंद कर दिया है।
कोचों को खेल उपकरण जमा करने के निर्देश जारी हो चुके हैं। 2018 में राज्य को राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी मिली है, लेकिन प्रशिक्षण के अभाव में कैसे अच्छे खिलाड़ी तैयार होंगे, यह सोचनीय है।
खेल और खिलाड़ियों के विकास के लंबे चौड़े दावे होते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। जिले में जिला खेल विभाग द्वारा हर साल खेल प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाता है।
यह शिविर तहसील और विकासखंड स्तर पर लगाए जाते हैं। बताया गया है कि इस बार खेल विभाग ने दिसंबर 2015 से ही प्रशिक्षण शिविर बंद करा दिए हैं। जबकि शिविर 15 फरवरी तक चलते हैं। वर्तमान में केवल अल्मोड़ा स्टेडियम में शिविर संचालित हो रहा है।
रानीखेत, ताड़ीखेत, द्वाराहाट, सल्ट, बग्वालीपोखर, डीनापानी, गोविंदपुर में कराटे, हॉकी, फुटबाल, ताइक्वांडो, हैंडबाल, बॉक्सिंग सहित तमाम खेल शिविरों में बड़ी संख्या में बालक-बालिकाएं प्रशिक्षण ले रहे थे, लेकिन दिसंबर से प्रशिक्षकों की कोचिंग बंद है।
प्रशिक्षकों का कहना है कि विभाग की तरफ से खेल उपकरण जमा कराने के निर्देश जारी हो गए हैं। उन्होंने दो माह का मानदेय तक नहीं मिला है। 2018 में उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेल होने हैं, इन हालातों में कैसे अच्छे खिलाड़ी तैयार करे जाएं, यह अनिश्चितता बनी हुई है।