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अस्पताल नहीं रेफर सेंटर है सीएचसी

Thu, 23 Jul 2015 12:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/चौखुटिया (अल्मोड़ा)।
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सीएचसी की व्यवस्था पीपीपी मोड में जाने के बाद और बदहाल हो गई है। पीपीपी मोड के प्रबंधक 20 माह बाद भी अनुबंध के अनुरूप डॉक्टरों की तैनाती नहीं कर पाए हैं।
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 सरकारी खजाने से लाखों रुपया प्रतिमाह अतिरिक्त खर्च होने के बावजूद सुविधाओं में कोई इजाफा नही हुआ है। अल्ट्रासाउंड मशीन जंक खा रही है तो ओटी न होने से सर्जन खाली बैठे हैं।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को नवंबर 2013 में शील नर्सिंग होम बरेली को पीपीपी मोड़ में दिया गया था। परंतु 20 माह बाद भी प्रबंधतंत्र अनुबंध के अनुरूप जरूरी 12 डॉक्टरों की तैनाती नहीं कर पाया है, जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
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हालत यह है कि आज भी डॉक्टरों के आधे पद खाली हैं। सर्जन हैं परंतु ओटी में जरूरी सुविधा व उपकरण न होने से वे खाली बैठे हैं।

 रेडियोलॉजिस्ट न होने से आठ माह पूर्व लगी अल्ट्रासाउंड मशीन जंक खाने लगी है। होम्योपैथिक चिकित्सक का पद तीन साल से खाली है।

 स्वास्थ्य केंद्र में दो सरकारी चिकित्सकों सहित कुछ सरकारी स्टाफ अलग से है। इस सबके के बावजूद अस्पताल रेफर सेंटर बनकर रह गया है।

सरकार को उम्मीद थी की डॉक्टरों को पहाड़ चढ़ाने की उसकी नाकाम कोशिश अस्पताल को पीपीपी मोड में देने के बाद पूरी हो जाएगी। परंतु ऐसा नहीं हो पाया है।

पीपीपी मोड में भी डॉक्टरों की कमी पूरी नहीं हो पाई है। पीपीपी मोड के जो डॉक्टर तैनात हैं वे भी अपनी मर्जी से चलते हैं। मसलन वे अस्पताल में 10 बजे तक ही पहुंचते हैं जबकि समय आठ बजे का है।

 इस बावत पीपीपी मोड के स्थानीय प्रबंधक भरत बिष्ट बताते हैं कि वे डॉक्टरों को आए दिन नोटिस दे रहे हैं परंतु कोई लाभ नही हुआ है। ज्यादा सख्ती करते हैं तो वे छोड़कर चले जाते हैं।
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