उत्तराखंड भ्रमण के दौरान पुलिस, प्रशासन, स्थानीय नागरिकों का इतना सहयोग मिला कि हमें महिलाएं होने का अहसास ही नहीं हुआ। चार धाम यात्रा को लेकर बाहरी राज्यों में कई प्रकार का दुष्प्रचार है, लेकिन यहां पहुंचकर सुखद अहसास हुआ। आपदा के बाद सरकार ने अच्छे इंतजाम किए हैं। यह कहना है गुजरात, महाराष्ट्र की छह महिला बाइकर्स का, यह बाइकर्स दिल्ली से हरिद्वार, बद्रीनाथ, केदारनाथ, माणा होते हुए शनिवार की देर शाम यहां पहुंचीं।
सुरक्षित भारत अभियान के तहत छह महिला बाइकर्स का यह दल महाराष्ट्र की शीतल बेर्डे के नेतृत्व में यहां पहुंची। गुजरात की सारिका मेहता ने बताया कि सभी महिलाएं छह मई को सूरत में एकत्र हुई, यहां से बाइकों को ट्रेन के माध्यम से दिल्ली पहुंचाया गया। आठ मई को बाइकर्स ने दिल्ली से अभियान की शुरुआत की। 10 मई को बद्रीनाथ पहुंचकर मंदिर के दर्शन किए। इसके बाद सभी बाइकर्स माणा तक यात्रा की।
डा. सारिका मेहता ने कहा कि बाहरी राज्यों में चार धाम यात्रा को लेकर तमाम तरह की भ्रांतियां फैली हैं, यहां सरकार ने अच्छे इंतजाम किए हैं, अधिकांश सड़कों की हालत भी ठीक है। हालांकि बार-बार बारिश, बर्फबारी से परेशानी होना लाजमी है। जोशीमठ-ग्वालदम की सड़क जरूर कुछ खराब है। यात्रा में सभी लोगों का इतना सहयोग मिला कि महिलाएं होने का हमें अहसास तक नहीं हुआ। चार धाम यात्रा को लेकर डरने की जरूरत नहीं है। वहां सभी जा सकते हैं। दल में सूरत की पायल, मुंबई की नियामदा, तृप्ति, शुभांगी मांजरेकर शामिल हैं।
अगली बार भी बढ़चढ़कर भाग लेंगी। यहां से यह दल नैनीताल के लिए रवाना हुआ। उन्हें व्यापारी हरचरन जसवाल चरन भाई, आनंद अग्रवाल आदि ने विदाई दी।
लिम्का बुक में दर्ज है शीतल का नाम
बाइकर्स दल का नेतृत्व कर रही शीतल बेर्डे का नाम दो बार लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज है। वर्ष 2010, 2011 में महिला बाइकर शीतल ने लेह लद्दाख के सबसे ऊंचे दर्रों मिसिलखिला और खारदुंगला को बाइक से फतह कर चुकी हैं। वह हिमालयन मोटर साइकिल रैली में भी भाग ले चुकी है। डा. सारिका मेहता ने बाइक से 24 घंटे में 1760 किमी की यात्रा तय कर रिकार्ड बना चुकी हैं। उन्होंने बताया कि वह यूरोप में प्रस्तावित वन वर्ड पीस राइड में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।