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जैनोली के चैतव म्यल में झोड़ा गायन की धूम      

Sat, 15 Apr 2017 10:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
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मेले मे झोड़ा प्रस्तुत करते लोग। - फोटो : अमर उजाला
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जैनोली में ऐतिहासिक चैतव म्यल में झोड़ा गायन की धूम मची रही। सैमधार मंदिर परिसर में आयोजित मेले में विभिन्न गांवों से आए ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ शिरकत की। मंदिर परिक्रमा के बाद झोड़ा गायन का दौर चला। भारी संख्या में बाहर से आए लोगों ने दुकानें भी सजाई थीं। मेले में विधायक करन माहरा ने भी शिरकत की और मेले के विकास के लिए प्रयास करने का आश्वासन दिया।      
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बैसाखी पर्व पर हर साल यहां एक दिनी चैतव म्यल का आयोजन होता है। ग्रामीणों की टीमों ने मंदिर की परिक्रमा की। इस बार पिलखोली, जैनोली, जोग्याड़ी, शिलंगी, चमोली, तस्वाड़, खग्यार, डौनी, उपराड़ी, बजीना, बजोल, टाना, पन्याली, डौरब, टूनाकोट, भड़गांव के ग्रामीण नगाड़े-निशानों के साथ झोड़ा गाते हुए सुबह मंदिर परिसर में एकत्र हुए।

इसके बाद झोड़ा गायन का सिलसिला चला। खोलि दे माता खोल भवानी धारमां केवाड़ा सहित तमाम पारंपरिक झोड़े गाए गए। इससे पूर्व सुबह के समय शिलंगी गांव में माहरा, फर्त्याल लोगों के बीच औपचारिक रूप से बग्वाल भी खेली गई। पिलखोली निवासी प्रधान संगठन के पूर्व प्रदेश महामंत्री हरी सिंह नेगी ने कहा कि इस ऐतिहासिक मेले को राज्य मेले का दर्जा नहीं मिल सका है। पूर्व में उन्होंने के लिए भरपूर प्रयास किए, लेकिन लोगों का सहयोग नहीं मिला। इस दौरान कनिष्ठ प्रमुख अंबादत्त पंत, बीडीसी सदस्य त्रिभुवन फर्त्याल, पूरन सिंह माहरा, गौरव फर्त्याल, प्रधान प्रदीप बिष्ट, खजान बिष्ट, बाघंबर सिंह, अरविंद सिंह थे।      
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