जीबी पंत पर्यावरण संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद वैज्ञानिक। स्वयं
अल्मोड़ा। विश्व में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां विकराल रूप ले चुकी हैं। जिसके संरक्षण और रोकथाम के लिए क्षेत्रीय सहयोग से नीति निर्माण कर धरातल पर काम करना होगा। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी में पर्यावरण संस्थान और अंतरराष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केंद्र (इसीमोड), काठमांडो, नेपाल के बीच हिमालयी क्षेत्रों में शोध, विकास कार्यों में परस्पर साझेदारी की संभावना पर संस्थान में आयोजित विचार-विमर्श कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने यह बात कही।
संस्थान के निदेशक प्रो. सुनील नौटियाल ने कहा कि पर्यावरण संस्थान और इसीमोड हिमालयी क्षेत्रों में मिल कर कार्य कर रहे हैं। वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. जेसी कुनियाल ने कहा कि वन संरक्षण, हिमालयी पारिस्थितिकी और पारिस्थितिक पर्यटन के बीच संबंधों की गहरी समझ को बढ़ावा देकर क्षेत्र को प्रभावित करने वाली समस्याओं के समाधान के लिए इसीमोड के साथ मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है। इसीमोड काठमांडो के महानिदेशक डॉ. पेमा ग्याम्त्शो ने कहा कि संस्थान आठ सदस्य देशों के साथ विभिन्न हिमालयी क्षेत्रों में मिलकर कार्य कर रहा है जिसका नेटवर्क दुनिया भर में फैला हुआ है। अगर दोनों संस्थान मिलकर हिमालयी क्षेत्रों की चुनौतियों पर कार्य करें तो इससे बेहतर परिणाम सामने आएंगे। इसीमोड के पूर्व महानिदेशक पद्मश्री डॉ. एकलव्य शर्मा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. आईडी भट्ट ने औषधीय पौधों की खेती, हरित पर्वत अर्थव्यवस्था पर जोर दिया।
वहां आरके सिंह, डॉ. राजेश जोशी, डॉ. के चंद्रशेखर, डॉ. संदीपन मुख़र्जी, देवेंद्र सिंह, डॉ. एके साहनी, डॉ. सतीश आर्य, डाॅ. केएस कनवाल आदि मौजूद रहे। संवाद