उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी एवं नानीसार बचाओ संघर्ष समिति ने सीबीसीआईडी पर भू-माफियाओं से मिलकर उपपा नेताओं और ग्रामीणों के खिलाफ झूठे मामले बनाने का आरोप लगाया है। पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि नानीसार में जिंदल के कर्मचारियों की ओर से दर्ज किए गए फर्जी मुकदमे की जांच करने वाले सीबीसीआईडी के अधिकारियों की मिली भगत की सरकार को उच्च स्तरीय जांच करनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि 23 जनवरी 2016 को नानीसार आंदोलन के दौरान न्यायालय के कर्मचारी के साथ क्षेत्र में जाने पर उनके और रेेखा धस्माना के साथ तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत की शह पर मारपीट की गई थी। जिसको लेकर उन्होंने एफआईआर दर्ज कराई थी और पूरे प्रदेश में इसको लेकर विरेध प्रदर्शन हुए थे। उन्होंने कहा कि इस मामले में सरकार की शह पर उनके खिलाफ फर्जी एससी-एसटी एक्ट में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। जिस पर आंदोलन को दबाने के लिए बेबुनियाद आरोप पत्र विशेष सत्र न्यायालय मेें दायर किया गया है। जिसमें न्यायालय ने छह दिसंबर की तिथि नियत की है।
तिवारी ने कहा कि अब तक उनके साथ मारपीट और अपराध करने वाले आरोपियों पर सीबीसीआईडी ने कार्रवाई नहीं की, उल्टा फर्जी मुकदमे में चार्जशीट दायर की गई है। जिसकी सरकार को पुन: निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और जांच एजेंसी की जिंदल के साथ मिली भगत है और पूरा उत्तराखंड इस मामले में सच्चाई जानता है। इस घटना से सीबीसीआईडी का असली चेहरा सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में भाजपा की जनता को न्याय देने की सभी घोषणाएं कागजी साबित हो रही है।