घुसेला पंपिंग पेयजल योजना से बीटीकेआईटी को जोड़े जाने की सुगबुगाहट से ग्रामीण भड़क गए हैं। यह योजना आठ गांवों के लिए बनी है। ग्रामीणों का कहना है कि इन गांवों में पहले से ही पानी की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पाती और अब इंजीनियरिंग कालेज को भी इससे जोड़ने के प्रयास चल रहे हैं, जो कि ठीक नहीं है। ग्रामीणों की यहां हुई बैठक में इस कवायद का विरोध किया गया, बाद में जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजकर आंदोलन की चेतावनी दी गई।
मालूम हो कि घुसेला पेयजल पंपिंग योजना से सलना, छतैंणा, कुई, मैनोली, तल्ली कहाली, मल्ली कहाली, चौनलिया सहित कुल आठ गांव जुड़े हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आए दिन योजना से इन गांवों में पानी की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पाती, ग्रामीण पारंपरिक नौले, धारों पर निर्भर रहते हैं। सलना की प्रधान गुड्डी देवी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इन्हीं गांवों से जुड़े जनप्रतिनिधियों ने कहा कि किसी भी हालत में योजना से संस्थान को नहीं जोड़ने दिया जाएगा।
वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण लंबे समय से पेयजल आपूर्ति नहीं होने से परेशान हैं, बार-बार शिकायतों के बावजूद विभाग सुनवाई नहीं करता और अब योजना से बीटीकेआईटी को भी जोड़ने के प्रयास चल रहे हैं, जिसे कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा। बाद में जिलाधिकारी को भेजे ज्ञापन में ग्रामीणों ने कहा कि यदि मनमानी हुई तो ग्रामीण एकजुट होकर आंदोलन शुरू कर देंगे।
बैठक में सलना के क्षेत्र पंचायत सदस्य नारायण अधिकारी, तल्ली कहाली के प्रधान पूरन चंद्र पांडेय, छतैना के प्रधान सांसद प्रतिनिधि कैलाश भट्ट, भूपेंद्र अधिकारी, नंदन सिंह, बहादुर सिंह, किशोर सिंह, चंपा देवी, ललिता देवी, पन्ना देवी, नंदी देवी, ममता देवी, आशा देवी, मंजू देेवी सहित आठों गांवों के जनप्रतिनिधि और महिलाएं मौजूद थे।