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नानीसार मामले में सीबीसीआईडी की अंतिम रिपोर्ट खारिज

Fri, 19 Apr 2019 11:26 PM IST
दीपक नेगी अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा।
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प्रतीकात्मक - फोटो : amar ujala
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 न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने नानीसार मामले में उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी और रेखा धस्माना के साथ 27 जनवरी 2016 की आपराधिक घटना के मामले में जिंदल कर्मचारियों के पक्ष में सीबीसीआईडी की अंतिम रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने एक माह के भीतर फिर से विवेचना कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश सीबीसीआईडी को दिया है। न्यायालय ने कहा है कि विवेचक की रिपोर्ट तथ्यों और गवाहों पर आधारित न होने से स्वीकार योग्य नहीं है।
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23 जनवरी 2016 को ग्रामीणों को मिले एक स्थगनादेश को लेकर न्यायिक कर्मचारियों के साथ पीसी तिवारी आदि नानीसार गए थे। प्रतीक जिंदल, प्रेम पाल और उनके बाउंसरों ने पीसी तिवारी के साथ मारपीट की और रेखा धस्माना का टेबलेट भी जबरन ले लिया। इस मामले में पीसी तिवारी और जिंदल ग्रुप के कर्मचारियों ने राजस्व पुलिस में एक दूसरे के खिलाफ रिपोर्ट की थी। सीबीसीआईडी ने पीसी तिवारी, रेखा धस्माना और नानीसार के ग्रामीणों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट समेत तमाम धाराओं में आरोप पत्र दाखिल किया था और पीसी तिवारी के खिलाफ अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी। अधिवक्ता पीसी तिवारी ने सीबीसीआईडी की जांच रिपोर्ट संख्या 44/2017 को न्यायालय में चुनौती दी थी। उन्होंने आरोप पत्र में दर्ज  बयानों, सीबीसीआईडी द्वारा आरोपितों की कॉल डिटेल के साथ उन पर लगाए गए एससी/एसटी मामले के निर्णय की प्रति न्यायालय में पेश की। 

न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक कुमार श्रीवास्तव ने दिए गए निर्णय में सीबीसीआईडी की अंतिम रिपोर्ट को खारिज करते हुए आदेश में कहा है कि यह अंतिम रिपोर्ट कतई स्वीकार करने योग्य नहीं है। उन्होंने केस डायरी में दर्ज गवाहों के बयानों, मेडिकल रिपोर्ट, आरोपियों की मोबाइल लोकेशन उसी क्षेत्र में होने आदि का उल्लेख करते हुए सीबीसीआईडी को एक माह में पुन: विवेचना कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। 
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