छावनी परिषद उपाध्यक्ष पद को भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों ने अपनी प्रतिष्ठा का विषय बना लिया है। इसको लेकर खींचतान मची है। सात सभासदों वाले कैंट सदन में उपाध्यक्ष पद के लिए चार सभासदों का बहुमत जरूरी है। चुनकर आए तीन सभासद भाजपा के तो तीन कांग्रेस समर्थित बताए जा रहे हैं। एक सभासद निर्दलीय हैं। उसको अपनी ओर खींचने के प्रयास चल रहे हैं। चर्चा है कि दोनों दलों के लोग निर्दल के मान-मनौव्वल में जुटे हैं।
छावनी परिषद के सभासद के लिए 11 जनवरी को मतदान, मतगणना और परिणाम घोषित हुए थे। वार्ड नंबर एक से व्यापार संघ अध्यक्ष यतीश रौतेला की पत्नी बिंदु रौतेला, वार्ड नंबर दो से आठवीं बार जीते भुवन आर्य, वार्ड नंबर तीन से दूसरी बार जीते मोहन नेगी, चार से युवा विनोद कुमार आर्य, पांच से पूर्व सभासद उमेश पाठक की बहू अर्चना पाठक, छह से दूसरी बार संजय पंत तथा सात नंबर वार्ड से युवा सुकृत शाह सभासद चुने गए। सभासद चुनाव के ठीक एक माह बाद उपाध्यक्ष पद का चुनाव होता है।
सात वार्ड वाले कैंट बोर्ड सदन में उपाध्यक्ष के लिए चार सभासदों का बहुमत जरूरी होता है, इस बार भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों ने इसे प्रतिष्ठा बना लिया है। तीन सभासदों को भाजपा समर्थित तो तीन को कांग्रेस समर्थित बताया जा रहा है। एक सभासद अभी किसी दल में नहीं हैं। चर्चा है कि निर्दल सभासद को अपने अपने पक्ष में खींचने के प्रयास चल रहे हैं। इसके लिए दोनों दलों के लोग निष्पक्ष के मान मनौव्वल में जुटे हुए हैं। देखना यह है कि अब ऊंट किस करवट बैठेगा। हालांकि दोनों दलों के लोग इस पर कुछ भी बोलने से इनकार कर रहे हैं। कैंट बोर्ड के मुख्य अधिशासी अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह का कहना है कि सभासदों को गजट नोटिफिकेशन के लिए पत्र हाईकमान भेजा गया है।