रानीखेत (अल्मोड़ा)। देश को आजाद हुए 73 साल का वक्त बीत गया, लेकिन रानीखेत क्षेत्र के लोग आज भी अंग्रेजों के बनाए काले कानून के भीतर ही दिन गुजारने को विवश हैं।
दरअसल, रानीखेत छावनी परिषद के तहत आता है। कैंट एक्ट के जटिल प्रावधानों के तहत लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। लीज नवीनीकरण, जमीनों का मालिकाना हक तक नहीं मिल पाता। यही नहीं सुधारीकरण के कार्यों को भी आसानी से मंजूरी नहीं मिल पाती। हालांकि 2006 में कैंट एक्ट 1924 में संशोधन हुआ, लेकिन इसका भी नागरिकों का लाभ नहीं मिला। अब नए प्रस्तावित कैंट एक्ट को जहां जनोपयोगी बनाने की मांग उठ रही है, वहीं कुछ लोगों का कहना है कि जब कश्मीर में धारा 370 हट सकती है तो कैंट एक्ट का समाप्त क्यों नहीं किया जा सकता।
लोगों का कहना है कि सरकार ने धारा 370 सहित तीन तलाक जैसे कानून को खत्म कर दिया। राम मंदिर निर्माण जैसे ऐतिहासिक कदम उठा दिए। लेकिन देश की 62 छावनियों को अंग्रेजों के काले कानूनों ने जकड़ रखा है। छावनी के तहत रहने वाले लोगों को जमीन का मालिकाना हक नहीं मिल रहा। लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया बेहद जटिल है। लीज समाप्त होने पर कई भवन स्वामियों नवीनीकरण के नाम पर लाखों रुपये के नोटिस थमा दिए जाते हैं।
देश सरकार बड़े-बड़े फैसले ले रही है। कश्मीर से धारा 370 हटा दी। इसी तरह कैंट एक्ट को भी समाप्त किया जाना चाहिए। इससे देश के 62 कैंटों में रहने वाले लोगों को अंग्रेजी काले कानून से तो निजात मिलेगी। मैंने स्वयं इस संबंध में प्रधानमंत्री को पत्र भी भेजा है। लीज नवीनीकरण के लिए लोग बेहद परेशान हो जाते हैं। जनहित में एक्ट को खत्म करना जरूरी है।
-आनंद अग्रवाल, सामाजिक कार्यकर्ता, रानीखेत।
अंग्रेजों ने अपनी सहूलियत के लिए कैंट एक्ट 1924 बनाया था, लेकिन 2006 के संशोधन में भी नागरिक हितों का ध्यान नहीं रखा गया। सरकार धारा 370 की तर्ज पर कैंट एक्ट को समाप्त करे और नागरिकों को राहत पहुंचाए। इससे जहां लोगों को लीज नवीनीकरण में सहूलियत होगी, वहीं तमाम अन्य कार्यों के लिए भी उन्हें परेशान नहीं होना पड़ेगा।
-नंदकिशोर गर्ग, वरिष्ठ पत्रकार, एनयूजे प्रदेश सचिव रानीखेत।
कैंट एक्ट 1924 में संशोधन का लाभ नहीं मिला। कैंट लैंड एडमिनिस्ट्रेशन रूल 1937 को भी सरल बनाने की जरूरत है। इससे लीज नवीनीकरण, लीज वर्गीकरण में आसानी होगी। पूर्व रक्षा मंत्रियों ने एक्ट में संशोधन को लेकर तमाम प्रयास किए, अब जो नया प्रस्तावित कैंट एक्ट है। उसका भी जनता को अधिक लाभ मिलता नहीं दिख रहा है।
- मोहन नेगी, पूर्व छावनी उपाध्यक्ष रानीखेत।