अल्मोड़ा। भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) ने फोर-जी सेचुरेशन प्रोजेक्ट के तहत अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत जिले में 152 जगहों पर टावर स्थापित किए हैं। धारचूला, मुनस्यारी जैसे दुर्गम क्षेत्रों में भी उपभोक्ताओं के फोन की घंटियां बजेंगी। वीडियो कॉल से जुड़ना आसान होगा और बफरिंग की समस्या से मुक्ति मिलेगी।
बीएसएनएल के उपभोक्ताओं को हाईस्पीड इंटरनेट की सौगात देगा। फोर-जी सेचुरेशन प्रोजेक्ट अल्मोड़ा से लेकर नेपाल और चीन सीमा तक 152 फोर-जी टावर स्थापित किए हैं। इससे लोग अब बिना किसी रुकावट के वीडियो कॉल के माध्यम से अपनों का हाल जान सकेंगे।
उन्हें अब वीडियो देखने या बात करने में बफरिंग की समस्या से भी नहीं जूझना पड़ेगा। चारों जिलों में बीएसएनएल के 1,50,000 से अधिक उपभोक्ता हैं। उन्हें बेहतर सुविधाएं देने के उद्देश्य में फोर-जी मोबाइल टावर स्थापित किए है। बीएसएनएल का दावा है टावर स्थापित होने से बीएसएनएल की आय बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को भी हाईस्पीड इंटरनेट की सुविधा मिलेगी। संवाद
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कहां कितने टावर स्थापित
बीएसएनएल ने फोर-जी सेचुरेशन प्लान के तहत अब तक अल्मोड़ा में 29, बागेश्वर में 46, चंपावत में 31 और पिथौरागढ़ में 46 टावर स्थापित किए। चारों जिलों में अभी 39 टावर और स्थापित होंगे। वहीं निगम ने इन जिलों में 26 स्थानों पर टू-जी और थ्री-जी टावरों को फोर-जी टॉवरों में अपग्रेड किया है।
सौर ऊर्जा से संचालित होगे टाॅवर
चारों जिलों में बीएसएनएल के फोर-जी टावर सौर ऊर्जा से संचालित होंगे। इससे बिजली की खपत घटेगी और बिजली गुल होते ही कनेक्विटी में आने वाली दिक्कत से छुटकारा मिलेगा। टावर में सोलर सिस्टम स्थापित होने से बीएसएनएल की सेवाएं बाधित नहीं होंगी। करीब हर माह एक लाख यूनिट से अधिक की बिजली बचेगी।
कोट
- फोर-जी सेचुरेशन प्रोजेक्ट के तहत चार जिलों में 152 टावर स्थापित किए गए हैं। बीएसएनएल के उपभोक्ता को अब फोर-जी की हाईस्पीड इंटरनेट सुविधा मिलेगी। इससे बीएसएनएल के उपभोक्ताओं की संख्या में वृद्धि होगी। शेष 39 स्थानों पर जल्द टावर स्थापित हो जाएंगे। - एसएन रावत, डीजीएम, बीएसएनएल, प्रचालन क्षेत्र अल्मोड़ा।