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बेहतर परीक्षाफल देने में फिसड्डी साबित हो रहे हैं सरकारी स्कूल

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अल्मोड़ा। सरकार प्रतिवर्ष सरकारी स्कलों के शिक्षकों के वेतन और संसाधन उपलब्ध कराने में करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को निजी स्कूलों के शिक्षकों से कई गुना अधिक वेतन मिल रहा है, लेकिन सरकारी स्कूल बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने में फिसड्डी साबित हो रहे हैं। नगर के सरकारी, अर्द्ध सरकारी बालक इंटर कॉलेजों का कोई भी छात्र मेरिट सूची में स्थान नहीं बना सका है।
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उत्तर प्रदेश के जमाने में जीआईसी अल्मोड़ा समेत नगर के सरकारी और अर्द्ध सरकारी स्कूलों का मेरिट सूची में दबदबा रहता था, लेकिन पिछले कुछ सालों से इन सरकारी, अर्द्ध सरकारी स्कूलों के परीक्षाफल में निरंतर गिरावट आ रही है। जीआईसी अल्मोड़ा में 12वीं में सबसे अधिक 87 फीसदी अंक प्रिंस प्रजापति ने पाए हैं, जबकि दसवीं में अजय कार्तिक ने 90.3 फीसदी अंक पाए हैं। जीआईसी में इंटर में 159 में से 137 बच्चे सफल रहे। जिसमें 50 प्रथम श्रेणी और शेष 87 बच्चे द्वितीय, तृतीय श्रेणी, दसवीं में 89 बच्चों में से 62 उत्तीर्ण रहे। इनमें से 30 ने प्रथम श्रेणी और शेष ने 32 बच्चे द्वितीय और तृतीय रहे हैं। हालांकि बालिका सरकारी और अर्द्धसरकारी स्कूल कुछ हद तक नाक बचाने में सफल रहे। राजा आनंद सिंह जीजीआईसी अल्मोड़ा की छात्रा कनिका गुरुरानी ने दसवीं में 16वीं रैंक और आर्य कन्या इंटर कॉलेज की पार्वती चौहान ने 17रैंक पाई है।
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