अल्मोड़ा(रोहित भट्ट)। सांस्कृतिक नगरी की पहचान रही बोगनवेलिया की खूबसूरत और विशाल लताओं को बेसहारा हुए एक साल हो गया है। आज भी लोग जब इस राह से गुजरते हैं तो देवदार के पेड़ और उसका आलिंगन किए हुए बोगनवेलिया की लताओं को याद किए बिना नहीं रह पाते। देवदार तो रुखसत हो गया लेकिन बोगनवेलिया को बेसहारा और नष्ट होने को छोड़ गया। अब बोगनवेलिया की बचीखुची लताओं को खुद का अस्तित्व बनाए रखने के लिए सहारे की आवश्यकता है।
अल्मोड़ा के गोविंद बल्लभ पंत पार्क में बोगनवेलिया की लताओं से लदा विशाल देवदार का पेड़ पिछले साल आठ जुलाई को धराशायी हो गया था। देवदार के पेड़ के धराशायी होने के कारण बोगनवेलिया की लताओं को भी नुकसान पहुंचा था। वह किसी तरह जिंदगी की जंग तो जीत गईं लेकिन बिना सहारे के लताएं कब तक जीवित रह पाएंगी, यह कह पाना संभव नहीं है। अगर जल्द इन लताओं को कोई सहारा नहीं दिया गया तो इनके अस्तित्व पर खतरा मंडरा सकता है। जब भी लोग मालरोड से आवाजाही करते हैं तो देवदार की ठूंठ और बेसहारा बोगनवेलिया को देखकर मन मसोस कर रह जाते हैं। ऐसा हो भी क्यों नहीं, आखिर किसी को तपती दोपहर में देवदार और बोगनवेलिया की छांव में राहत मिलती थी तो किसी को जिंदगी भर की यादें। (संवाद)
- बोगनवेलिया की बेलों को बढ़ाने और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय पर्यावरण संस्थान कोसी-कटारमल से बातचीत हुई है। जल्द ही इस स्थान पर एक पेड़ लगाया जाएगा ताकि बोगनवेलिया की बेलें फिर से बढ़ सकें और सुरक्षित रह सकें। - प्रकाश चंद जोशी, नगर पालिका अध्यक्ष अल्मोड़ा
अब तो पक्षी भी नहीं बनाते इस जगह अपना घरौंदा
अल्मोड़ा। बोगनवेलिया से लिपटे देवदार में पक्षियों की चहचहाहट सुनाई देती थीं। कई पक्षियों ने पेड़ पर घरौंदा बनाया था। पेड़ के धराशायी होने से सब कुछ खत्म हो गया। इस स्थान अब कभी-कभी पक्षी दिखाई देते हैं लेकिन वह यहां घरौंदा नहीं बनाते हैं। (संवाद)
शहर में एक और बोगनवेलिया बना रहा अपनी पहचान
अल्मोड़ा। बोगनवेलिया की एक लता नगर के कैंट में है। पिछले कई वर्षों से बोगलवेलियां की बेलें एक पेड़ से लिपटी हैं। इसकी सुंदरता देखते ही बनती है। यह पेड़ लोगों को गोविंद बल्लभ पंत पार्क में फूलों से लदे बोगनवेलिया की याद दिलाता है।