ताड़ीखेत क्षेत्र में सुअरों के डर से लोगों द्वारा बंजर छोड़े गए खेत। अमर उजाला
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। ताड़ीखेत ब्लॉक से जुड़े दर्जनों गांवों में जंगली सुअरों और बंदरों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। फल, सब्जी उत्पादन के लिए मशहूर सिलोर, गगास घाटी में सुअरों ने खेत खोदकर किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। कई स्थानों पर ग्रामीण रतजगा कर सुअरों को भगाने का प्रयास भी कर रहे हैं। छोटे-छोटे बगीचे भी जानवरों ने उजाड़कर रख दिए हैं।
सिलोर पट्टी में जंगली जानवरों का आतंक लंबे समय से चल रहा है। डौड़ाखाल, चौना, सलोनी, लोटना, गटोली, चौगांव, मजगांव, सगनेटी सहित दर्जन भर गांव अधिक प्रभावित हैं। इस पट्टी में हरी सब्जी, आलू, प्याज, लहसुन, मडुवा, गहत, भट दालों और नींबू, माल्टा आदि फलों का उत्पादन भी प्रचुर मात्रा में होता है, लेकिन जंगली सुअरों ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया है।
सुअर खेतों में बड़े-बड़े गड्ढे कर दे रहे हैं। साल भर की मेहनत बर्बाद होता देख किसान हताश हैं। वन पंचायत के पूर्व जिलाध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर भट्ट ने बताया कि दिन में बंदरों का उत्पात और रात्रि में सुअरों ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। कई बार इस संबंध में वन विभाग के अधिकारियों से कई बार वार्ता हो चुकी है, लेकिन सार्थक कार्रवाई आज तक नहीं हुई। इधर, जंगली जानवरों के आतंक के चलते ग्रामीण खेती से विमुख होने लगे हैं।