रानीखेत (अल्मोड़ा)। उत्तराखंड में हाल ही में संपन्न हुए पंचायत चुनावों ने लोकतंत्र की मर्यादाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख चुनाव की प्रक्रिया के दौरान जिस तरह से हिंसा, अपहरण, गोलीबारी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं, उसने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया।
जिला नैनीताल के बेतालघाट में हुए गोलीकांड से लेकर नैनीताल में जिला पंचायत सदस्यों के अपहरण तक, वही अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट ब्लॉक में ईंट-पत्थर चलने से लेकर ब्लॉक प्रमुख प्रत्याशी के घर के बाहर हुई फायरिंग की घटना ने यह साबित कर दिया कि मौजूदा जनप्रतिनिधियों की ओर से मतदान में लोकतांत्रिक मूल्य कहीं न कहीं दब रहे हैं। इससे न सिर्फ उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है, बल्कि आम जनता का भरोसा भी चुनावी प्रक्रिया से उठता जा रहा है।
लोकतंत्र पर सवाल
इस बार चुनाव में हुई घटनाओं से साफ हो गया कि पंचायत चुनाव की बागडोर जनता से छीनकर कुछ गिने-चुने जनप्रतिनिधियों के हाथ में सिमट गई है, जहां दबाव, धनबल और बाहुबल निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। चुनाव प्रक्रिया में बढ़ रही हिंसा ने उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि जब हर चुनाव में अपहरण, खरीद-फरोख्त और हिंसा हावी हो जाए तो फिर लोकतंत्र का असली स्वरूप खो जाता है।
जनता की राय - प्रत्यक्ष चुनाव ही समाधान
लगातार बिगड़ते हालत के बीच अब जनता खुलकर सामने आ रही है। लोगों का कहना है कि जिस तरह नगर निकायों में मेयर वही पालिका में अध्यक्ष का चुनाव सीधे जनता से कराया जाता है, उसी तर्ज पर जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख का चुनाव भी प्रत्यक्ष प्रणाली से होना चाहिए।
कोट
- जब चुनाव जनप्रतिनिधियों के जरिए होते हैं तो खरीद-फरोख्त और दबाव की राजनीति बढ़ती है। यही कारण है कि हिंसा और अपहरण जैसी घटनाएं बार-बार सामने आती हैं। अगर जनता सीधे वोट करेगी तो ये गड़बड़ियां अपने आप कम हो जाएंगी। - दिनेश चंद्र, निवासी चौकुनी
- प्रत्यक्ष प्रणाली से उम्मीदवार सीधे जनता के पास जाएंगे, इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और वे जनता के प्रति ज्यादा जवाबदेह होंगे। आज की स्थिति में कुछ लोग मिलकर अध्यक्ष चुन लेते हैं, जिससे असली लोकतंत्र कमजोर पड़ रहा है। - दीपक नेगी, ग्राम स्यों, ताड़ीखेत