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खत्म होते जा रही जैव विविधता के संरक्षण पर दिया जोर

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अल्मोड़ा। अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी-कटारमल के इनविस केंद्र और उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी परिषद देहरादून के सहयोग से वेबिनार हुआ। इसका विषय था भारतीय हिमालयी क्षेत्र में जैव विविधता संरक्षण अनुसंधान और समस्या समाधान के लिए एक भविष्यवादी दृष्टिकोण। इसमें जैव विविधता के संरक्षण का आह्वान किया गया।
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वेबिनार में संस्थान के निदेशक ई. किरीट कुमार ने संस्थान के पूर्व निदेशक स्व. डॉ. आरएस रावल को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने डॉ. रावल का योगदान बताया। संस्थान के जैव विविधता संरक्षण एवं प्रबंधन केंद्र के अध्यक्ष डॉ. आईडी भट्ट ने बताया कि वेबिनार का विषय कोविड-19 महामारी परिदृश्य के तहत दुनिया के बदलते दृष्टिकोण के साथ मेल खाता है।
वेबिनार का उद्देश्य हिमालयी जैव विविधता के संरक्षण और सदुपयोग के लिए आने वाली समस्याओं के समाधान पर विचार विमर्श कर हितधारकों के विविध समूह से सुझाव आमंत्रित करना है। उन्होंने सभी विशेषज्ञों से हिमालयी जैव विविधता के संरक्षण और सदुपयोग के लिए कार्रवाई उन्मुख समाधान के लिए आगामी रणनीति बनाने का अनुरोध किया।
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संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जीसीएस नेगी ने बताया कि संस्थान ने उत्तराखंड के 50 लोगों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया है। वेबिनार में भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के पूर्व निदेशक डॉ. जीएस रावत, एचएफआरआई शिमला के निदेशक डॉ. एसएस सामंत, संस्थान के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. एसके नंदी ने भी विचार रखे।
संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. केसी सेकर ने आभार जताया। वेबिनार में डॉ. बीएस अधिकारी, डॉ. एमडी बहेड़ा, डॉ. एन क्षेत्री, डॉ. जीसी जोशी, डॉ. एमसी नौटियाल, डॉ. एसके नंदी, डॉ. एसएस रसीले, डॉ. एम साह, डॉ. एल तिवारी आदि थे।
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