कुमाऊं में पंचायत चुनाव के नतीजों ने सियासी दिग्गजों के साथ राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है। मतगणना के अलग-अलग राउंड में नेताओं की धड़कनें लगातार बढ़ती रहीं। जनता ने ऐसा जनादेश दिया कि अंतिम समय तक बड़े नेताओं को भी अंदाजा नहीं होने दिया कि इस चुनाव में ऊंट किस करवट बैठेगा। कई सीटों पर रोचक मुकाबलों के बाद परिणाम अप्रत्याशित रहे।
सल्ट के भाजपा विधायक महेश जीना के बेटे करन नहीं बचा सके विरासत
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में स्याल्दे ब्लॉक की बबलिया क्षेत्र पंचायत सीट पर भाजपा को बड़ा झटका लगा है। क्षेत्र पंचायत सदस्य पद पर विधायक महेश जीना के बेटे करन जीना को हार का सामना करना पड़ा। बवलिया सीट पर क्षेत्र पंचायत सदस्य पद के लिए करन जीना और करन नेगी चुनाव मैदान में थे। करन जीना राजनीतिक घराने से थे। समर्थकों को उनकी जीत की उम्मीद थी लेकिन घोषित परिणामों ने सबको बींका दिया। करन नेगी ने राजनीतिक घराने के करन जीना को 51 मतों से पराजित कर
जीत हासिल की। विजेता प्रत्याशी करन नेगी को 304, करन जीना को 253 मत मिले हैं। कुल पड़े 569 वोटों में से 12 अवैध घोषित किए गए। करन जीना के चुनाव पर सबकी निगाहें थीं क्योंकि उनके पिता महेश जीना लगातार दूसरी बार के विधायक हैं। उनकी अच्छी राजनीति पकड़ है। ये हार जीना परिवार की राजनीति साख पर भी दाग से कम नहीं है। करन को आगामी ब्लॉक प्रमुख पद के लिए भी प्रबल दावेदार माना जा रहा था। उनके चाचा स्व. सुरेंद्र सिंह जीना इससे पहले तीन बार लगातार विधायक रहे थे।
भाजपा नेता न खुद पंचायत चुनाव जीते, ना ही पत्नी को जिता सके
अल्मोड़ा जिले के भैसियाछाना ब्लॉक में हुए पंचायत चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है। भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के मंडल अध्यक्ष संतोष कुमार राम और उनकी पत्नी पूजा देवी दोनों को क्षेत्र पंचायत चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। ब्लॉक प्रमुख का पद एससी वर्ग के लिए आरक्षित होने के बाद संतोष कुमार को प्रबल दावेदार माना जा रहा था। संतोष नौगांव सीट से चुनावी मैदान में थे, | जहां उन्हें सूरज कुमार ने 267 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया। हैरानी की बात यह रही कि भाजपा जैसे बड़े संगठन से जुड़े होने के बावजूद संतोष तीसरे स्थान पर खिसक गए। यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी और संतोष को ब्लॉक प्रमुख पद के संभावित उम्मीदवारों में गिना जा रहा था। इसी बीच उनकी पत्नी पूजा देवी डूंगरलेख सीट से चुनाव लड़ीं, लेकिन वे भी मतदाताओं का विश्वास जीतने में असफल रहीं। यहां प्रिया चम्याल जीतने में सफल रहीं।
ब्लॉक प्रमुख सिर्फ सात वोट से हारे, पत्नी भी नहीं जीत सकीं
बागेश्वर/कपकोट क्षेत्र पंचायत सदस्य पद के चुनाव में किलपारा सीट पर बड़ा उलटफेर हुआ है। यहां निवर्तमान ब्लॉक प्रमुख और पूर्व में जिपं सदस्य रहे गोविंद सिंह दानू को हार का सामना करना पड़ा है। उन्हें किशन सिंह दानू ने महज सात मतों के अंतर से हराया। वदियाकोट क्षेपं सीट से उनकी पत्नी किरन दानू को भी पराजय का मुंह देखना पड़ा है। किलपारा क्षेपं सीट से गोविंद दानू के अलावा किशन सिंह दानू, नीरज विष्ट और धरमा देवी भी चुनाव मैदान में थी। कयास लगाए जा रहे थे कि गोविंद दानू इस सीट पर आसानी से जीत हासिल करेंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं। किशन सिंह दानू ने 275 बोट लाकर इस सीट से जीत हासिल की। गोविंद दानू 268 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे। बदियाकोट सीट से निवर्तमान प्रमुख दानू की पत्नी किरन दानू चुनाव मैदान में थी। उन्हें 304 वोट मिले जबकि खिलाफ सिंह ने 518 मत प्राप्त कर शानदार जीत हासिल की।