अल्मोड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उद्यान विभाग ने एक अहम कदम उठाया है। मौन पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभाग 1500 मौन बक्सों का निशुल्क वितरण करेगा। इस पहल से न केवल स्वरोजगार को प्रोत्साहन मिलेगा बल्कि किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
मौन पालन कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय माना जाता है। शहद उत्पादन से सीधी आमदनी के साथ-साथ मधुमक्खियों की ओर से किए जाने वाले परागण से फसलों की गुणवत्ता और पैदावार में भी उल्लेखनीय सुधार होता है। इससे किसानों को दोहरा लाभ मिलेगा। उद्यान विभाग के अनुसार, योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को मौन बक्सों के साथ-साथ आवश्यक तकनीकी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा ताकि वे वैज्ञानिक तरीके से मौन पालन कर सकें। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ-साथ बेरोजगारी कम करने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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एक बक्से में 15 से 20 किलो शहद का उत्पादन संभव
मौन पालन अल्मोड़ा जैसे पर्वतीय जिले के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक मौन बक्से से सालाना औसतन 15 से 20 किलोग्राम शहद उत्पादन संभव है। इस आधार पर योजना के पूर्ण क्रियान्वयन से जिले में सालाना 22,500 से 30,000 किलोग्राम (22 से 30 टन) तक शहद उत्पादन होने का अनुमान है। शहद उत्पादन से किसानों को सीधी आमदनी मिलेगी।
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इनसेट कोट -
जिले भर में मौन पालन को बढ़ावा देने के लिए 1500 बक्से निशुल्क बांटे जाएंगे। इसका मुख्य उद्देश्य शहद उत्पादन को बढ़ावा देकर किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है। -डॉ. नरेंद्र कुमार, डीएचओ अल्मोड़ा