बदहाली का दंश झेलता अम्याड़ी-कुणकोली मोटर मार्ग। संवाद न्यूज एजेंसी
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। तमाम कोशिशों के बाद भी अम्याड़ी-कुणकोली मोटर मार्ग की दशा नहीं सुधर सकी है, जबकि इस मोटर मार्ग को बने एक दशक से अधिक का समय बीत चुका है। ग्रामीण डामरीकरण की राह तक रहे हैं, लेकिन शासन की ओर से डामरीकरण के प्रस्ताव को ही मंजूरी नहीं मिल रही है। बरसात में सड़क के हालात और खराब हो गए हैं। इस कारण वाहन चालक इस सड़क पर वाहन चलाने से भी डर रहे हैं।
अम्याड़ी-कुणकोली मोटर मार्ग के लिए वर्ष 2008 में पहाड़ कटान हुआ था। रधुलीपीपल इंटर कॉलेज समेत चलसिया पड़ोली, अम्याड़ी, कुणकोली, नौधर आदि गांव इस सड़क से जुड़े हैं लेकिन डामरीकरण न होने से इसमें कीचड़ भरी है। इसमें वाहन फंस जा रहे हैं। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में ग्रामीणों के पसीने छूट रहे हैं। बदहाल सड़क के कारण 108 एंबुलेंस वाहन तक गांव में नहीं पहुंच रहे हैं। लोनिवि निर्माण खंड के ईई एमसी जोशी का कहना है कि 2.20 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। यह फाइल शासन स्तर पर लंबित है।
डामरीकरण के अभाव में सड़क बनने का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। 10 साल बाद भी डामरीकरण नहीं हो पाना दुर्भाग्यपूर्ण है। बरसात में लोगों को भारी परेशानी होती है। शासन को तत्काल इस संबंध में सार्थक कार्रवाई करनी चाहिए।
- नारायण दत्त पंत, कुणकोली।
कैंसर विशेषज्ञ पद्मश्री स्व. मोहन चंद्र पंत के कुणकोली गांव को जोड़ने वाली सड़क ही बदहाली का दंश झेल रही है। डॉ. पंत जीवित होते तो इस मार्ग में डामरीकरण हो जाता, लेकिन जनप्रतिनिधियों ने समस्या को नहीं सुलझाया।
- मदन पंत, पुरोहित, कुणकोली गांव।