पद्मश्री डा. अनिल जोशी ने कहा है कि यदि गांव नही रहेंगे तो फिर ये राज करने वाले भी नही रहेंगे। इन्हें गांव के लोगों को बताना होगा कि उन्होंने 15 सालों में गावों के लिए क्या किया। जनता को बताया जाना चाहिए कि ये 16 हजार गांवों की सरकार है या फिर आठ शहरों और 40 से 45 कस्बों की सरकार। उन्होंने कहा कि यदि गांव की जनता जागी तो फिर गांव ही राजनीति के असल केंद्र होंगे।
गांव बचाओ यात्रा पर निकले डा. जोशी यहां क्रांतिवीर चौराहे पर नुक्कड़ सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गांव के लोगों की सरकारों से पूछने की बारी है कि उनके लिए क्या किया गया। पूछा जाना चाहिए कि क्या गांव राज्य का हिस्सा नहीं हैं, यदि हैं तो फिर गांव के लिए क्या किया गया है। गांव की बर्बादी क्यों की जा रही है। उन्होंने कहा कि अब चुप रहने का समय नही है। इस मौके पर कमल जोशी, ईश्वर जोशी, जगदीश चंद्र ने भी विचार रखे।
यात्रा में डा. जोशी के अलावा मुन्ना सिंह राणा, द्वारिका प्रसाद सेमवाल, मनमोहन नेगी, सत्येंद्र पवार, जगदंबा प्रसाद नैथानी, हर्षवर्धन् नवानी, डा. हिमानी, शालिनी नेगी, पिंकी चौहान, एचबी डिमरी, मयंक चमोली आदि शामिल थे। गिर्दा के प्रसिद्ध गीत हम लड़ते रया दाज्ये हम लड़ते रोंला से सभा की शुरुआत हुई। इससे पूर्व गांव बचाओ यात्रा के चौखुटिया पहुंचने पर लोगों ने स्वागत किया।
इस मौके पर हुई संक्षिप्त बातचीत में डा. जोशी ने यात्रा के उद्देश्य के बारे में बताते हुए कहा कि वे गांव की पीड़ा को समझने, पीड़ा को बांटने के साथ ही लोगों को जोड़कर सरकारों पर दबाव बनाने की पृष्ठभूमि तैयार करने के मकसद से निकले हैं। उन्होंने कहा कि यदि गांव नही जागे तो फिर गांवों की बर्बादी तय है। यदि गांव एकजुट हुए तो फिर गावों की अनदेखी करने की हिम्मत कोई नही कर पाएगा।