नगरपालिका परिषद अल्मोड़ा की वित्तीय स्थिति खस्ताहाल है। भवन कर, दुकानों के किराए आदि से पालिका परिषद को साल भर में डेढ़ करोड़ रुपए की आय होती है जबकि कर्मचारियों के वेतन समेत सभी मदों पर साढ़े आठ करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। कर्मचारियों के वेतन के लिए शासन से हर साल 5.93 करोड़ रुपए अनुदान मिलता है। इस समय पालिका पर 18 करोड़ रुपए से अधिक की देनदारी है।
पालिका को अतिरिक्त संसाधन जुटाने भी मुश्किल हो रहे हैं। इस हालत में पालिका जनता को पर्याप्त सुविधाएं देने के बजाय एक तरह से बोझ साबित हो रही है।
पालिका परिषद को तहबाजारी, भवनकर, किराया, लाइसेंस फीस, भवन मानचित्र आदि मदों से करीब 1.50 करोड़ की वार्षिक आय होती है। यह आय पालिका के वाहनों, डीजल, सफाई उपकरण, लाइट उपकरण, स्टेशनरी, बिजली टेलीफोन बिल, कीटनाशक आदि पर ही खर्च हो जाती है। पालिका में 230 कर्मचारियों के अलावा 72 सफाई स्वयं सेवक हैं। इनके वेतन पर प्रतिमाह 59 लाख खर्च होता है।
जो कि साल में करीब 7.08 करोड़ बैठता है। कर्मचारियों के वेतन के लिए शासन से करीब 5.93 करोड़ रुपए वार्षिक अनुदान मिल रहा है। अनुदान मिलने के बावजूद हर वर्ष एक करोड़ रुपये से अधिक वेतन के लिए अन्य मदों से जुटाना पालिका के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
पालिका परिषद पर कर्मचारियों के पीएफ , छठे वेतनमान के एरियर, पेंशन अवशेष, एरियर, ग्रेच्युटी की 12 करोड़ रुपए की देनदारी वर्षों से लंबित है। इसके अलावा 2004-05 में शॉपिंग कांप्लैक्स निर्माण को हुडको से लिए 4.5 करोड़ रुपए ऋण, निर्माण एजेंसी का 1.50 करोड़ रुपए बकाया है। पालिका पर कुल 18 करोड़ रुपए से अधिक की देनदारी है।
नगर पालिका परिषद अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी का कहना है कि आर्थिक किल्लत के चलते पालिका परिषद कर्मचारियों को बड़ी मुश्किल से वेतन दे पा रही है। भवन कर और दुकानों आदि का किराया बोर्ड द्वारा तय दरों के हिसाब से हर पांच साल में बढ़ाया जाता है। शासन से अनुदान मिलने के बावजूद फरवरी के वेतन में 28 लाख और मार्च के वेतन के लिए 58 लाख की कमी पड़ रही है। शासन से पालिका परिषद को 12 करोड़ रुपए देने की मांग की गई है। शासन से अल्मोड़ा पालिका को तीन करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है।