प्रदेश सरकार पर्वतीय क्षेत्र में कृषि को बढ़ावा देने के लाख दावे करे, लेकिन हकीकत इसके उलट है। धौलादेवी ब्लाक में सरयू नदी से सिर्फ 300 मीटर की दूरी पर आरा गांव की करीब एक हजार नाली से अधिक उपजाऊ जमीन सिंचाई के अभाव में बर्बाद हो रही है।
इन खेतों तक पहुंचने वाली आरा नहर पिछले नौ साल से बंद है। अनाज के उत्पादन के लिए मशहूर आरा सेरा में सिंचाई व्यवस्था नहीं होने से कई काश्तकार खेती छोड़ने लगे हैं। पानी के अभाव में खेती चौपट होने से कई लोग गांव छोड़ चुके हैं।
सरयूघाटी क्षेत्र में धान, गेहूं, आलू, गडेरी के अलावा आम, केला, पपीता, अमरूद आदि फलों का भी बहुतायत में उत्पादन होता है। अन्न उत्पादन के लिहाज से आरा गांव की एक हजार नाली से अधिक आरा सेरा की समतल भूमि काफी समृद्ध है। 2005 से पहले जब तक आरा नहर से सिंचाई के लिए खेतों तक पानी पहुंचता था तो गांव के लगभग सभी परिवार साल भर का अनाज उगा लेते थे।
पीएमजीएसवाई में आरा-दन्यां सड़क निर्माण के दौरान गिराए गए मलबे से नहर क्षतिग्रस्त हो गई। 2006 में हुए भूस्खलन से नहर पूरी तरह ध्वस्त हो गई। तब से आज तक इस नहर को दुरुस्त नहीं किया गया है। क्
षेत्र के ग्रामीण बताते हैं कि कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को आपबीती सुना चुके हैं, लेकिन कोई सुन नहीं रहा है। एक तरफ अनुपयोगी योजनाओं में करोड़ों रुपये फूंके जा रहे हैं, लेकिन इस उपजाऊ जमीन में सिंचाई के लिए नहर को दुरुस्त नहीं किया जा रहा है।
सिंचाई की व्यवस्था नहीं होने से काश्तकारों ने खेत बंजर छोड़ दिए। इसी जमीन से करीब आधा किमी दूर रज्यूड़ा में नहर चालू होने से खेतों में फसल लहलहा रही है। मालूम हो कि आरा सेरे के 300 मीटर नीचे से ही सदानीरा सरयू नदी बहती है। काफी कम लागत में यहां से पानी लिफ्ट कर सिंचाई सुविधा जुटाई जा सकती है, लेकिन ग्रामीणों की सुनने वाला कोई नहीं है।