रानीखेत (अल्मोड़ा)। 20 से अधिक गांवों को जोड़ने वाली बजोल-अल्मियाकांडे सड़क सरकारी मशीनरी की अनदेखी का प्रमाण है। इस सड़क पर निर्माण के 14 साल बाद भी डामरीकरण नहीं हो सका है। ढाई किमी की इस सड़क पर डामरीकरण करने में सरकारी मशीनरी के पसीने छूट रहे हैं और क्षेत्र की 18 हजार की आबादी बदहाल सड़क से मुक्ति मिलने की राह देख रही है।
विकास खंड ताड़ीखेत के कनार, मंगडोली, खुडोली, खान, कांडा, जाला, डूंगरा, ईनाड़ समेत 20 गांवों को हल्द्वानी-रानीखेत स्टेट हाईवे से जोड़ने के लिए वर्ष 2010 में ढाई किमी लंबी बजोल-अल्मियाकांडे सड़क का निर्माण किया गया। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब सड़क से आवाजाही शुरू होगी और उनकी परेशानी काफी हद तक कम हो जाएगी। यह उम्मीद अब तक परवान नहीं चढ़ सकी है। 14 साल बाद भी डामरीकरण न होने से सड़क बदहाल है। जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं, इससे दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। हालात यह हैं कि दुर्घटना के डर से चालक इस सड़क पर वाहनों का संचालन नहीं कर रहे हैं और ग्रामीण पैदल सफर करने के लिए मजबूर हैं। संवाद
सुरक्षा दीवार क्षतिग्रस्त होने से खतरा बढ़ा
रानीखेत। लाखों रुपये खर्च कर बनी सड़क ग्रामीणों के काम नहीं आ रही है। डामरीकरण और नाली निर्माण न होने से बारिश के पानी से सड़क की सुरक्षा दीवारें जगह-जगह क्षतिग्रस्त हैं। चालकों के इस सड़क पर वाहनों का संचालन न करने से ग्रामीण 20 किमी का अतिरिक्त फेरा लगाकर रानीखेत बाजार पहुंचने के लिए मजबूर हैं।
लोनिवि (प्रांतीय खंड) रानीखेत के सहायक अभियंता कुंदन सिंह बिष्ट ने सड़क में डामरीकरण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। धनराशि स्वीकृत होने के बाद ही डामरीकरण का कार्य शुरू किया जाएगा।