जिला प्रशासन ने तेजी से बरबाद हो रहे अल्मोड़ा के प्राकृतिक नौलों को पुनर्जीवित करने और इनके संरक्षण का काम विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान को सौंपने का निर्णय लिया है। इनके जीर्णोद्धार के लिए बजट जिला योजना से दिया जाएगा और जीर्णोद्धार का काम भी विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की निगरानी में ही होगा। बाद में मोहल्लों के लोगों के सहयोग से संस्थान आगे भी इनका रखरखाव करेगा। जिलाधिकारी की इस पहल से अल्मोड़ा के नौलों को नया जीवन मिलने की उम्मीद है।
मालूम हो कि संरक्षण और देखरेख के अभाव में अल्मोड़ा के दर्जनों प्राकृतिक नौले विलुप्त होने की कगार पर हैं। इनमें कई नौले अत्यंत जीर्ण हालत में होते हुए भी लोगों की प्यास बुझाते हैं। जब भी नगर में पानी की आपूर्ति ठप होती है लोग इन नौलों की तरफ ही भागते हैं, लेकिन आज तक इन नौलों की देखरेख की जिम्मेदारी किसी एजेंसी के पास नहीं है। कुछ जागरूक मोहल्लों के लोगों ने अपने क्षेत्र के नौलों को संरक्षित किया है, लेकिन ज्यादातर नौले खराब हालत में हैं। कई जगह तो नौले का नामोनिशान नहीं है और वहां जमीन पर भी लोगों ने कब्जा कर लिया है।
अब जो प्राकृतिक नौले पूरी तरह बरबाद होने से बचे हैं और जीर्ण हालत में हैं उन्हें पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी सविन बंसल ने वीपीकेएस के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. जेके बिष्ट के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम बनाई है। यह टीम 15 सितंबर तक नौलों के बारे में सर्वेक्षण करके रिपोर्ट देगी। जिलाधिकारी ने बताया कि सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर नौलों के जीर्णोद्धार के लिए योजना बनाई जाएगी और जीर्णोद्धार का काम भी वीपीकेएएस के वैज्ञानिकों की देखरेख में किया जाएगा। इसके लिए जिला योजना से बजट दिया जाएगा।
अब सिर्फ तीन दर्जन नौलों में ही है पानी
अल्मोड़ा। अस्सी के दशक में अल्मोड़ा नगर क्षेत्र में सौ से अधिक नौले थे, लेकिन अब करीब 50 नौले ही रह गए हैं इनमें भी करीब तीन दर्जन नौलों में ही पानी है। बढ़ते शहरीकरण के चलते की कई स्थानों पर नौले भी अतिक्रमण की चपेट में आ गए हैं। वहीं देखरेख के अभाव में कई नौले सूख भी चुके है। ड्रेनेज की व्यवस्था नहीं होने से कई नौले प्रदूषित हो गए हैं। जिनका पानी पीने योग्य नहीं है। एक सर्वेक्षण के मुताबिक 2009 में अल्मोड़ा में 73 नौले ही वजूद में थे। इनमें से 36 नौलों में ही पानी था। वर्तमान में करीब 50 नौले बचे हैं इनमें भी करीब तीन दर्जन नौलों में ही पानी उपलब्ध है। अगर इन तीन दर्जन नौलों को भी संरक्षित कर लिया जाए तो यह लोगों के बहुत काम आ सकेंगे।