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भिकियासैंण में पुरातात्विक स्मारकों की खोज होगी 

Fri, 16 Jun 2017 09:58 PM IST
दीप जोशी, अल्मोड़ा।
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राज्य बनने के बाद अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण तहसील में 9वीं से 12वीं सदी के तीन-चार शिव मंदिरों का पता लगा था। साथ ही अंग्रेज शासनकाल में यहां छठी सदी के दो महत्वपूर्ण ताम्र पत्र भी प्राप्त हुए।  इन ताम्र पत्रों से यह भी माना जाता है कि एक समय इस क्षेत्र में बर्मन वंश का साम्राज्य रहा होगा। इसलिए विशेषज्ञों को इस पूरे क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पुरावशेष बिखरे होने की संभावना है। इसे देखते हुए पुरातत्व विभाग ने तहसील के 397 गांवों का व्यापक सर्वेक्षण करने का प्रस्ताव तैयार किया है। दो-तीन दिनों में यह प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जाएगा। केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद सर्वे शुरू करके संबंधित इलाके में मिलने वाले स्मारकों आदि के संरक्षण की योजना तैयार की जाएगी।
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 भिकियासैंण के इलाके में स्थित पालेश्वर शिव मंदिर के अलावा भर्सोली, चम्याड़ी और टिटरी में स्थित शिव मंदिर 9वीं से 12वीं शताब्दी के मध्य के माने जाते हैं। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. चंद्र सिंह चौहान के मुताबिक 18वीं शताब्दी के अंतिम दशक में तहसील के अंतर्गत स्थित पालेश्वर शिव मंदिर के पास दो ताम्र पत्र मिले थे। यह दोनों ताम्रपत्र छठी शताब्दी में पौरव वंशीय द्विज बर्मन और द्विति बर्मन के काल के माने जाते हैं। कई इतिहासकारों के मुताबिक उस दौर में हिमालयी क्षेत्र में शासन करने वाले बर्मन साम्राज्य की राजधानी ब्रह्मपुर में थी, जो स्याल्दे देघाट का इलाका माना जाता है। इस सबको देखते हुए ही पुरातत्व विभाग ने भिकियासैंण तहसील के सभी 397 गांवों का स्थलीय सर्वेक्षण कराने का प्रस्ताव तैयार किया है।

डॉ. चौहान ने बताया कि स्थलीय सर्वेक्षण में क्षेत्र में प्राचीन सिक्के, नौले, धारे, बिरखम, अभिलेख, ताम्रपत्र, मूर्तियों के अलावा प्राचीन मंदिर आदि के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। उन्होंने कहा कि कई बार लोगों को एतिहासिक और प्राचीन चीजों के बारे में जानकारी नहीं होती और वह अनजाने में इन्हें नष्ट कर देते हैं। इसे देखते हुए ही विभाग ने पूरे क्षेत्र में व्यापक सर्वेक्षण करने का प्रस्ताव तैयार किया है। उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव सोमवार को निदेशक के माध्यम से भारत सरकार को भेजा जाएगा। भारत सरकार से अनुमति मिलने के बाद सर्वेक्षण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। सर्वे में करीब छह माह का वक्त लगने का अनुमान है। सर्वेक्षण में जो भी मूर्तियां, अभिलेख, स्मारक आदि महत्वपूर्ण पाए जाएंगे उनके संरक्षण करने की कार्यवाही भी अमल में लाई जाएगी। 
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