यहां तहसील मार्ग पर आर्य समाज की सार्वदेशिक प्रतिनिधि सभा का सम्मेलन हुआ। इसमें सामाजिक बुराइयोें के खिलाफ पहल करने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने आर्य समाज के उद्देश्यों को सफल बनाने पर जोर दिया। विश्व की प्राचीनतम वैदिक संस्कृति के अनुसार मानवता की सेवा के व्यापक अभियान के साथ जुड़ने की अपील की। रविवार को जिला जज डा. जीके शर्मा ने समापन किया।
आर्य समाज के सम्मेलन में वक्ताओं ने समाज में व्याप्त नशा, बाल विवाह, भ्रूण हत्या, धार्मिक अंधविश्वास जैसी बुराइयों पर चर्चा की। इसे राष्ट्र, समाज की प्रगति में घातक बताया। कहा कि वर्तमान समय में देश की नई पीढ़ी को पाश्चात्य शिक्षा प्रणाली का अंधानुकरण के लिए मजबूर किया जा रहा है। युवाआें को भारतीय संस्कारों के साथ जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती ने मानवता की सेवा, वैदिक धर्म के मूल्याें की रक्षा के लिए 1875 में इस संगठन की स्थापना की थी। आज यह संस्था दुनियाभर में काम कर रही है। अनाथों की सेवा के लिए अनाथालय बनाए गए हैं। भारत में रुढ़िवादिता, पुरुष प्रधान मानसिकता की शिकार महिला के हितों की रक्षा को संस्था प्रतिबद्ध है।
इसके साथ ही हिंदी भाषा की रक्षा, प्रचार-प्रसार के प्रयास जारी हैं। समाज से अंधविश्वास, नशाखोरी आदि बुराइयों को दूर करने के लिए भी संस्था लगातार कार्य रही है। सम्मेलन मेें आर्य समाज के सार्वदेशिक प्रतिनिधि सभा के उपमंत्री एडवोकेट एडवोकेट गोविंद सिंह भंडारी, डा. ज्ञानप्रकाश कच्चाहारी, सुखदेव वर्मा, दिनेश, धरम सिंह, सोनियानंद, आदेश कुमारी, अन्नपूर्णा महाराज आदि ने विचार रखे। सायंकाल जिला जज डा. जीके शर्मा ने कार्यक्रम का समापन किया। वृक्षप्रेमी किशन सिंह मलड़ा ने अपनी वाटिका से चंदन के 50 पौधे बांटे। वहां कई लोगों को आर्य समाज की ओर से सम्मानित किया गया। समारोह में सीजेएम चंद्रमणी राय, नगर पालिका अध्यक्ष गीता रावल, रमेश प्रकाश पर्वतीय, रमा देवी आदि थे।