प्रशासन व वन विभाग के अधिकारियों से वार्ता करते तड़म क्षेत्र के ग्रामीण।
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अल्मोड़ा जिले के सल्ट विकासखंड के ग्राम सभा तड़म के बौरड़ा तोक में बीते रविवार को वन्यजीव के हमले से ग्रामीण महिपाल सिंह मेहरा की मौत के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया जिसके बाद हमलावर बाघ या तेंदुए को मारने की अनुमति दे दी गई है। इसके लिए कॉर्बेट से विशेषज्ञ शूटरों की टीम तैनात की गई है। क्षेत्र में चार पिंजरे लगाए गए हैं और कैमरा ट्रैप से निगरानी की जा रही है।
इससे पहले गुस्साए ग्रामीणों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए उठाने से रोक दिया और वन विभाग पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए थे। ग्रामीणों ने हमलावर बाघ को आदमखोर घोषित कर उसे मारने, पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने और एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग रखी। सूचना पर प्रशासन, पुलिस और वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। डीएफओ दीपक सिंह ने भी घटनास्थल का जायजा लिया। देर रात तक चली वार्ता के बाद ग्रामीणों ने अपनी मांगों का लिखित पत्र अधिकारियों को सौंपा जिस पर सहमति जताते हुए अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए। समझौते के तहत हमलावर बाघ या तेंदुए को मारने की अनुमति दे दी गई है। सल्ट विधायक महेश जीना ने भी वन मंत्री सुबोध उनियाल से सिफारिश की थी जिसे मानते हुए हमलावर बाघ या तेंदुए को मारने की अनुमति दी गई।
इसके अलावा मृतक के परिजनों को नियमानुसार मुआवजा देने, परिवार के एक सदस्य को वन विभाग में समायोजित करने व कुमेरिया से तड़म जाने वाले पैदल मार्ग पर सोलर लाइट लगाने का आश्वासन दिया गया। कुमेरिया-बौरड़ा प्रस्तावित सड़क पर वन विभाग की आपत्ति हटाने और निर्माण की मंजूरी देने की बात भी कही गई। ग्रामीणों ने मोहान क्षेत्र में सफारी जोन खुलने के बाद जंगली जानवरों के गांवों की ओर बढ़ने का आरोप लगाते हुए इसे बंद करने की मांग उठाई जिस पर अनिश्चितकाल के लिए रोक लगाने पर सहमति बनी है।
मांगों पर सहमति के बाद ग्रामीणों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जाने दिया। पोस्टमार्टम मोहान स्थित वन विभाग चौकी में रानीखेत से आई चिकित्सकों की टीम ने किया।
ये रहे मौजूद
डीएफओ दीपक सिंह, एसडीओ काकुल पुंडीर, रेंजर गंगाशरण, सल्ट उपजिलाधिकारी रिंकू बिष्ट, तहसीलदार आबिद अली, एसपी हरबंस सिंह, भतरौंजखान थानाध्यक्ष अवनीश कुमार, थानाध्यक्ष सल्ट कश्मीर सिंह, थानाध्यक्ष द्वाराहाट विनोद जोशी, एसआई लखविंदर सिंह, दर्जा राज्य मंत्री महेश्वर सिंह मेहरा, ज्येष्ठ प्रमुख विक्रम रावत, ग्राम प्रधानपति दयाल सिंह, गोपाल सिंह आदि।