जिला मुख्यालय स्थित एकमात्र महिला अस्पताल एक स्त्री रोग विशेषज्ञ के भरोसे है। जबकि अस्पताल में ईएमओ समेत सात डॉक्टर होने चाहिए। इनके अलावा एनेस्थीस्ट का पद छह माह से और बाल रोग विशेषज्ञ का पद पिछले तीन साल से खाली है। डॉक्टर नहीं होने से अस्पताल की व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। अन्य इलाज तो दूर अब यहां प्रसव के लिए भी महिलाओं को भर्ती नहीं किया जा रहा है और बेड खाली पड़े हैं। प्रसव के लिए महिलाएं प्राइवेट अस्पताल या फिर हल्द्वानी जा रहीं हैं।
महिला अस्पताल में जिले से ही नहीं पड़ोसी जिलों से भी महिलाएं प्रसव और अन्य इलाज के लिए आती हैं। अस्पताल में महीने में औसतन 1500 से 2000 ओपीडी में मरीज पहुंचते हैं। खासतौर से गर्भवती महिलाओं को इस अस्पताल से आस रहती है। महीने में औसतन 20 से 25 गर्भवतियों का यहां सीजर से प्रसव किया जाता है लेकिन डाक्टर नहीं होने से अस्पताल की व्यवस्था चरमरा गई है। इन दिनों प्रसव के लिए महिलाओं को भर्ती ही नहीं किया जा रहा है।
अस्पताल में पांच स्त्री रोग विशेषज्ञ में से मात्र एक कार्यरत हैं। दुर्घटना के बाद स्वास्थ्य संबंधी कारणों से एक डाक्टर बेस अस्पताल में अटैच हैं। जबकि एक डॉक्टर डेढ़ माह की सीसीएल पर हैं। एक संविदा डाक्टर का कांट्रेक्ट 28 फरवरी को समाप्त हो गया है। जबकि एक पद लंबे समय से रिक्त है। वहीं चिकित्साधिकारी ईएमओ के दो पदों में से संविदा पर कार्यरत एक ईएमओ का कांट्रेक्ट भी समाप्त हो गया है। एक अन्य संविदा ईएमओ का दूसरी जगह पर चयन होने से यह पद भी खाली पड़ा है। डाक्टर और सर्जन के नहीं होने से महिला रोगियों की परेशानियां बढ़ गई हैं। अस्पताल में मात्र एक डाक्टर ही रोगियों को देख रही हैं। सर्जन नहीं होने से गर्भवती महिलाओं के सीजर प्रसव नहीं हो पा रहे हैं और गंभीर रोगियों को बेस अथवा हल्द्वानी रेफर किया जा रहा है।