अल्मोड़ा। स्वच्छता सर्वेक्षण- 2020 पुरस्कार के लिए अल्मोड़ा कैंट बोर्ड को सिटीजन फीडबैक श्रेणी में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है। जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल कांफ्रेंसिंग के माध्यम से स्वच्छता सर्वेक्षण पुरस्कार की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने अल्मोड़ा कैंट को तीसरा स्थान प्राप्त होने पर सम्मानित किया। वहीं सभी श्रेणियों में अल्मोड़ा कैंट की रैकिंग जहां 40वीं है, वहीं रानीखेत कैंट स्वच्छता सर्वे में दो साल में तीसरे से 17वें स्थान पर जा पहुंचा है।
भारत सरकार के आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 पुरस्कार के लिए जिले से कैंट बोर्ड अल्मोड़ा को सिटीजन फीडबैक श्रेणी में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है। डीएम ने बताया कि बृहस्पतिवार को वर्चुअल कांफ्रेंस के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी ने पुरस्कार की घोषणा की। वर्चुवल कांफ्रेंस के माध्यम से पीएम ने डीएम नितिन सिंह भदौरिया और कैंट बोर्ड की मुख्य अधिशासी अधिकारी आकांक्षा तिवारी को सम्मानित भी किया।
मालूम हो कि देश की 62 छावनियों में हर साल स्वच्छता सर्वेक्षण कर स्वच्छता के आधार पर कैंटों को पुरस्कार दिया जाता है। इस बार अल्मोड़ा कैंट को सीटीजन फीडबैक श्रेणी में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है। पीएम ने बधाई देते हुए भविष्य में भी कैंट क्षेत्र समेत जिले को स्वच्छ रखने के लिए मेहनत से कार्य किया करने की आशा जताई। समारोह में वर्चुअल कांफ्रेंसिंग के माध्यम से देहरादून में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक, मुख्य सचिव ओम प्रकाश आदि ने हिस्सा लिया।
इस दौरान सीएम ने भी डीएम, मुख्य अधिशासी अधिकारी के अलावा इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले कैंट बोर्ड अध्यक्ष ब्रिगेडियर आईएस समयाल, कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष जंग बहादुर थापा, सफाई निरीक्षक राजेश बिष्ट समेत तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी। इससे पूर्व 2019 के स्वच्छता सर्वेक्षण में अल्मोड़ा कैंट ने देशी की 62 छावनियों में से 11वीं रैंक प्राप्त की थी। जबकि 2018 में सर्वेक्षण में अल्मोड़ा कैंट दूसरे स्थान पर रही। सीएम ने कहा कि आगे भी इसी प्रकार कैंट बोर्ड के अलावा जिले को स्वच्छ रखने में अपनी पूर्ण भागीदारी निभाएं।
रानीखेत तीन में ना तेरह में
रानीखेत (अल्मोड़ा)। स्वच्छता सर्वेक्षण में रानीखेत छावनी की रैंकिंग लगातार गिरती जा रही है। दो साल पहले 2018 में देश की बड़ी कैंटों में शुमार रानीखेत को तीसरा स्थान मिला था, जबकि पिछले साल इसकी रैंकिग 13वीं थी जो इस बार बढ़कर 17वें स्थान पर जा पहुंची है। इसके पीछे बजट के अभाव को वजह मानी जा रही है।
छावनी परिषद रानीखेत के अभिषेक आजाद ने बताया कि पिछले दो वर्षों से फंड में कमी आई है, जो भी स्वच्छता से संबंधित कार्य होने थे, वह प्रभावित हुए हैं। यहां तक कि सैलरी की समस्या भी आड़े आई। इन्हीं सब कारणों का प्रभाव पड़ा। कैंट को स्वच्छता सर्वेक्षण में फिर से अव्वल लाने के लिए भरपूर प्रयास किए जाएंगे।