बजता रहा पिता का फोन पर अंधेरे में वहां तक पहुंचना हुआ मुश्किल
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार संपर्क करने पर स्टाफ नर्स का फोन स्विच ऑफ आया। उनके पति मुनेंद्र के फोन पर घंटी जाती रही। पुलिस ने बताया कि अर्नव के कानों तक फोन की घंटी पहुंची लेकिन उसके लिए अंधेरे में वहां तक पहुंचना मुश्किल हुआ। सुबह होने पर वह माता-पिता के पास पहुंचा, लेकिन तब तक उनके फोन की चार्जिंग भी खत्म हो चकी थी और मोबाइल स्विच ऑफ हो गया था। ऐसे में वह मदद के लिए दो किमी दूर गांव पहुंचा।
समय पर पता चल जाता तो शायद बच जाती तीनों की जान
स्टाफ नर्स के परिजनों की सूचना पर सीएचसी देघाट के कर्मियों ने देघाट थाने को सूचना दी। रामनगर से आगे सल्ट और भतरौंजखान थाने को भी मामले की सूचना दी गई। तीनों थानों की पुलिस 12 घंटे से अधिक समय तक रामनगर से लेकर देघाट तक सड़क किनारे सर्च अभियान चलाती रही लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। दूसरे दिन सुबह घायल आदि ने ग्रामीणों को घटना की जानकारी दी तो पुलिस टीम मौके पर पहुंची लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। घटना का समय रहते पता चल जाता तो शायद तीनों की जान बच जाती।
नहीं मिली मोबाइल की लोकेशन
थानाध्यक्ष देघाट राहुल राठी ने कहा कि स्टाफ नर्स का फोन स्विच ऑफ हो गया लेकिन उनके पति के फोन पर घंटी बजती रही। मोबाइल के जरिए उनकी लोकेशन पता लगाने के काफी प्रयास किए गए। सही लोकेशन नहीं मिल सकी और उन तक पहुंचना चुनौती बन गया। स्पष्ट है कि संचार क्रांति भी काम नहीं आई। यदि घायल अर्नव गांव नहीं पहुंचता तो पुलिस को घटना का पता लगाने के लिए और ज्यादा जद्दोजहद करनी पड़ती।
एक फरवरी को ली थी सीएचसी देघाट में तैनाती
शशि रुड़की हॉस्पिटल में संविदा में स्टाफ नर्स पद तैनात थीं। बीती फरवरी में ही उन्हें स्थायी तौर पर सीएचसी देघाट में तैनाती मिली। तैनाती लेने के बाद वह कुछ दिन पूर्व बच्चों की गर्मियों की छुट्टी के चलते उनसे मिलने रुड़की पहुंचीं। अब वह बेटा-बेटी को अपने पास रखकर स्थानीय स्कूल में दाखिला दिलाना चाहती थीं।