अल्मोड़ा। जिले की बेटी नमिता कुमाऊं की लोककला को सहेजने के साथ ही 45 से अधिक महिलाओं को ऐपण कला की बारीकियां सिखाकर आत्मनिर्भर बना चुकी हैं। ऐपण कला को पहचान दिलाने वाली नमिता अपने हुनर से सालाना छह लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं।
जिले के जाखनदेवी निवासी नमिता तिवारी ने वर्ष 2004 में महिला हाट अल्मोड़ा से ऐपण कला का प्रशिक्षण लिया। वर्ष 2015 में नमिता ने चेली ऐपण सहायता समूह संचालित किया। वह महिलाओं को फाइल फोल्डर, साड़ी, बैग, टेबल, मैट, जूट, वुडन आइटम, बेड सीट पर ऐपण कला बनाने का प्रशिक्षण दे रहीं हैं।
वह उत्तराखंड, असम, सिक्किम, एनआईएफटी दिल्ली के पांच हजार से अधिक युवाओं को ऐपण कला का प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ चुकी हैं। वर्ष 2022 में ऐपण कला को बढ़ावा देने लिए नमिता को एसडीजी गोलकीपर, 2023 में सुषमा स्वराज अवॉर्ड और साल 2023 में हिमाद्री फिल्म प्रोडक्शन की ओर से देवभूमि लोक कला अवार्ड सम्मान मिल चुका है। नमिता ने बताया कि उनका उद्देश्य ऐपण कला को संरक्षित कर पहाड़ की महिलाओं का आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।