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ग्रामीण ऐपण को स्वरोजगार का जरिया बनाएं: पंत

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अल्मोड़ा के ज्योली में प्रशिक्षण कार्यशाला में मंचासीन अतिथिगण। - फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल की ओर से राजकीय प्राथमिक विद्यालय ज्योली में कुमाऊं की लोककला ऐपण पर सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू हो गई है। नाबार्ड के विकास प्रबंधक गिरीश चंद्र पंत ने बतौर मुख्य अतिथि कार्यशाला का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण ऐपण को स्वरोजगार का जरिया बना सकते हैं। उन्होंने विभागीय योजनाओं की जानकारी दी।
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कार्यक्रम की शुरुआत में संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सतीश आर्य ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने संस्थान का परिचय और कार्यक्रम की पृष्ठभूमि प्रतिभागियों को बताई। प्रशिक्षक इंजीनियर दीप चंद्र बिष्ट ने ऐपण कला की महत्ता और विपणन के बारे में जानकारी दी। दर्पण संस्था की विभु कृष्णा ने ऐपण की लोककला में आधुनिकता को समाहित कर इसे बाजार तक पहुंचाने पर जोर दिया। ज्योली की प्रधान देव सिंह भोजक, पुजारी ममता जोशी, प्रधान कनेली दीपा उपाध्याय, संस्थान के दरबान सिंह बिष्ट ने विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में संस्थान की दीप्ति भोजक ने अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार जताया। चेंज लीडर दीक्षा उपाध्याय और शुभम ने संचालन किया। कार्यक्रम में संस्थान के मनोज बिष्ट, गणेश सलाल, ईश्वर सियुनी, विजय लोहनी सोनी, मनीषा, संगीता, गायत्री, हेमा, विनीता, कविता आदि थे।
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