अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस) के नेतृत्व में विकसित कृषि संकल्प अभियान के 11वें दिन वैज्ञानिकों के एक दल ने ताड़ीखेत, मटीला, सूरी, गडस्यारी, बरशीला व पड्युला के 76 किसानों से संवाद किया। विशेषज्ञों ने कृषकों को कुरमुला प्रबंधन, कृषि यंत्रों, कंदन्न उत्पादन की जानकारी दी। संस्थान के विकसित गार्डन रेक किसानों को बांटे।
इस दौरान संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत ने मटीला गांव की महिला किसानों से पर्वतीय कृषि की चुनौतियों एवं संभावनाओं पर सीधा संवाद किया। संवाद के दौरान महिला किसानों ने पर्वतीय क्षेत्रों में यंत्रीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि पहाड़ों की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप कृषि यंत्रों की भारी कमी है जिससे खेती कार्य कठिन और श्रमसाध्य हो गया है। युवाओं के पलायन एवं पशुधन की घटती संख्या के कारण खेती के पारंपरिक साधन अब व्यावहारिक नहीं रह गए हैं।
एक महिला किसान ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें ऐसे यंत्रों की आवश्यकता है जो छोटे परिवारों की ओर से भी सरलता से उपयोग किए जा सकें और जिनसे पर्वतीय खेतों की जुताई जैसे कार्य वह स्वयं कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि जंगली जानवरों से फसल की सुरक्षा, वैज्ञानिक जानकारी का समय-समय पर प्रसार और क्षेत्र विशेष के अनुसार अनुकूल तकनीकों की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। निदेशक ने किसानों को आश्वस्त किया कि संस्थान कृषि यंत्रों, तकनीकों का विकास तथा जानकारी के प्रभावी प्रसार पर विशेष कार्य कर रह रहा है। वैज्ञानिकों के दूसरे दल ने ताड़ीखेत ब्लॉक के 11 गांवों के 172 किसानों से संवाद कर उन्हें खरीफ की प्रजातियों, सस्य विधियों, रोग-कीट नियंत्रण विधियों, कृषि संबंधित अन्य तकनीकियों के साथ ही सरकारी योजनाओं के बारे में बताया। नोडल अधिकारी डॉ. कुशाग्रा जोशी ने कहा कि अभियान के दौरान कृषि में जेंडर को मुख्य धारा में लाने के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे वैज्ञानिकों को प्राप्त हो रहे हैं। इनका पर्वतीय क्षेत्र के लिए पॉलिसी निर्माण के लिए विशेष महत्व है।