जीआईसी महाकालेश्वर में शिक्षक, प्रवक्ताओं की मांग को लेकर चलाया जा रहा आंदोलन मुख्य शिक्षा अधिकारी के साथ हुए लिखित समझौते के बाद समाप्त हो गया है। इससे पहले आंदोलनकारियों ने सीईओ का घेराव करने के साथ ही चौखुटिया-द्वाराहाट एनएच में करीब पौने घंटे तक चक्काजाम कर दिया। इस दौरान आक्रोशित आंदोलनकारी स्कूल में छुट्टी करवाकर बच्चों को भी धरना स्थल पर ले आए। बाद में गरमागरम बहस के बीच आखिरकार तीन प्रवक्ताओं की नियुक्ति का लिखित आदेश जारी होने पर आंदोलनकारी मान गए।
जीआईसी महाकालेश्वर में शिक्षक, प्रवक्ताओं की मांग को लेकर सात दिनों तक चला आंदोलन मुख्य शिक्षा अधिकारी हर्ष बहादुर चंद के साथ हुए लिखित समझौते के बाद समाप्त हो गया है। सीईओ ने मौके से ही गणित, जीव विज्ञान और हिंदी सहित तीन प्रवक्ताओं की वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश जारी किए। समझौते के तहत तय हुआ की आयोग से नियुक्ति अथवा एलटी से प्रोन्नत होने पर जीआईसी महाकालेश्वर में प्राथमिकता के आधार पर प्रवक्ताओं की नियुक्ति कर दी जाएगी। आंदोलनकारियों की दूसरी मांग कोटिकरण की विसंगति को दूर करने के संबंध में सीईओ ने कहा कि इस बारे शासन को पत्रावली भेज दी गई है। जिसमें शीघ्र कार्रवाई होने की उम्मीद है।
इससे पहले आंदोलनकारियों और सीईओ के बीच बहस होती रही। शुरुआती दौर में सीईओ की बातों से आक्रोशित आंदोलनकारियों ने नारेबाजी करते हुए उनका घेराव करने के साथ ही सड़क पर जाम लगा दिया। जिससे चौखुटिया-द्वाराहाट राष्ट्रीय राजमार्ग में करीब पौने घंटे तक वाहनों की आवाजाही ठप रही। बातचीत के दौरान सीईओ के अलावा प्रभारी बीईओ गणेश पाठक, पीटीए अध्यक्ष सूरज कुमयां, जिला पंचायत सदस्य शिवकुमार, गजेंद्र नेगी, बिंदेश्वरी पांडे, धीरज तिवारी, दीपक नेगी, बालादत्त तिवारी, कुंदन बिष्ट, दीवान सिंह बिष्ट, भुवन आर्या, हीरा नेगी, प्रधान खष्टी गिरी, बचीराम, मदन राम, राधा देवी, पार्वती बिष्ट, आनंदी देवी, देवकी देवी, हेमा देवी, जीवन अधिकारी, बचुली देवी, बबीता आर्या, उमेश कुमार, बसंती गिरी, रामसिंह किरौला, नंदन सिंह सुरेश कुमयां, केशर सिंह, पार्वती नेगी सहित भारी संख्या में ग्रामीण व स्कूल छात्र आदि मौजूद थे।
जाम की सूचना पर पहुंचे एसडीएम
महाकालेश्वर में आंदोलन समाप्त होने से पूर्व एनएच में अभिभावकों और छात्रों द्वारा लगाए गए चक्काजाम की सूचना मिलने पर उपजिलाधिकारी फिंचाराम चौहान और थाना पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। अलबत्ता उनके पहुंचने तक जाम खुल चुका था। एसडीएम बाद में आंदोलनकारियों के साथ हुई वार्ता में शामिल रहे।