आजादी के कई सालों बाद भी जिले का जैंती कस्बा तमाम समस्याओं से जूझ रहा है। जैंती कस्बे में आजादी के दशकों बाद भी सार्वजनिक शौचालय नहीं बन सका है। कस्बे में लोगों की काफी भीड़ रहती है लेकिन शौचालय नहीं होने के कारण पर्यटकों, राहगीरों और यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
अल्मोड़ा जिले का जैंती कस्बा सालम क्षेत्र का मुख्य केंद्र बिंदु है। आवागमन की दृष्टि से भी यह प्रमुख स्थल है। जैंती से हिमालय का मनोहारी दृश्य दिखाई देता है। इस कारण यह पर्यटकों का भी पसंदीदा स्थल है। कस्बे में हमेशा चहल पहल बनी रहती है, इसके बावजूद भी यह कस्बा आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। आजादी के कई सालों बाद भी जैंती कस्बे में कोई सार्वजनिक शौचालय नहीं बन सका है। शौचालय नहीं होने के कारण पर्यटकों और यात्रियों को भारी परेशानियों से जूझना पड़ता है। खासकर महिला यात्रियों को काफी परेशानी होती हैं।
आजादी की लड़ाई में सालम का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। देश को आजाद कराने लिए जैंती तहसील के स्व. नर सिंह धानक, टीका सिंह कन्याल ने अपना बलिदान तक दे दिया। आजादी के कई दशक गुजर जाने के बाद भी कस्बा समस्याओं से जूझ रहा है। जैंती के प्रधान राजेंद्र प्रसाद जोशी ने कहा कि कई बार मांग के बावजूद सार्वजनिक शौचालय का निर्माण नहीं हो सका है। उन्होंने कस्बे में शीघ्र शौचालय बनाने की मांग की है।