स्याल्दे (अल्मोड़ा)। स्याल्दे ब्लॉक के ग्राम पंचायत चिंतोली में पौराणिक परंपरा के अनुसार आयोजित पांडव लीला का शुभारंभ हो गया है। यह लीला तीन जनवरी तक चलेगी और स्थानीय लोगों के अनुसार पांडवों के अज्ञात वास से जुड़ी हुई है। कार्यक्रम में ग्रामीणों ने पारंपरिक ढोल-नगाड़ों के साथ भाग लिया और भव्य सांस्कृतिक आयोजन का आनंद उठाया।
कार्यक्रम संचालक गब्बर बेलवाल ने बताया कि पांडवों ने मत्स्यदेश की राजधानी विराट नगर में अज्ञात वास के दौरान उत्तराखंड के पहाड़ों में भेष बदलकर जीवन यापन किया था। इसी दौरान उन्होंने अपने पिता पांडू के श्राद्ध तर्पण के लिए इस क्षेत्र में भिक्षा मांग कर परंपरा निभाई। इस बार यह लीला 25 वर्षों के अंतराल के बाद आयोजित की जा रही है। ग्राम चिंतोली के अलावा मुनानी जिला (अल्मोड़ा), डढौली डुबडीकोट (गड़वाल क्षेत्र, पौड़ी), कफलसैण और बजाणी (चमोली) के ग्रामीण आयोजन में शामिल हो रहे हैं। कमेटी अध्यक्ष बचे सिंह बेलवाल, उपाध्यक्ष मान सिंह बेलवाल और कोषाध्यक्ष मान सिंह बेलवाल ने लीला की सफलता के लिए मेहनत की। रात्री में डंगरियों में पांडव अवतरित होते हैं जिससे दर्शकों को अनूठा और मनोरम नजारा देखने को मिलता है। आयोजकों ने अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संजोकर अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प भी लिया।