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दृष्टिहीनों की पहचान का प्रतीक है सफेद छड़ी

Mon, 20 Oct 2014 05:34 AM IST
Almora
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अल्मोड़ा। राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ उपशाखा की ओर से ‘सफेद छड़ी’ दिवस पर हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि सफेद छड़ी दृष्टिहीनों की पहचान का प्रतीक है। सड़क पर चलने पर सफेद रंग की छड़ी होने के कारण वाहन चालकों को दूर से ही देखने में सुविधा होती है। इससे दृष्टिहीनों के साथ दुर्घटना होने का खतरा कम रहता है।
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मुख्य वक्ता नेत्र विशेषज्ञ पूर्व स्वास्थ्य निदेशक डा. जेसी दुर्गापाल ने कहा कि इंग्लैंड के एक फोटोग्राफर जेम्स बिगस एक दुर्घटना के बाद दृष्टिहीन हो गए थे। जिस कारण उन्हें यातायात की अधिकता से असुविधा होती थी। उन्होंने 1921 में छड़ी को सफेद कर चलना शुरू किया तो यह छड़ी वाहन चालकों को आसानी से दिखाई देने लगी। 1931 में फ्रांस के गेली हरवोमेट ने राष्ट्रीय स्तर पर दृष्टिबाधितों के लिए सफेद छड़ी का आंदोलन शुरू किया।
छड़ी की उपयोगिता को देखते हुए द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद फ्रांस के नागरिकों को पांच हजार सफेद छड़ियां उपलब्ध कराई गई। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों में दृष्टिबाधित व्यक्ति गाइड या सहायक के रूप में कुत्ते की सहायता लेते हैं लेकिन भारत जैसे देश में दृष्टिहीनों को ऐसी सुविधा नहीं मिल पाती है। पूर्व प्रधानाचार्य गिरीश जोशी ने कहा कि पुलिस विभाग और वाहन चालकों को सफेद छड़ी के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए। ताकि उनसे दृष्टिबाधितों को मदद मिल सके। गोष्ठी में हिमालया सेवा संस्थान के सिकंदर जोशी किरन साह, पूजा पांडे, सुनीता दानू, पुष्कर बिष्ट, नवीन कुमार, भास्कर, ललित मोहन बिष्ट, पीसी तिवारी, दीप त्रिपाठी, महेश जोशी, नवीन कुमार, खजान जोशी, हरीश खुल्बे, दुर्गा दानू, नीमा डसीला आदि ने विचार रखे। अध्यक्षता संघ के उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह अधिकारी और संचालन महासचिव डीके जोशी ने किया।
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