अल्मोड़ा। प्रदेश कांग्रेस सरकार, पार्टी तथा प्रशासन का रवैया महापुरुषों के प्रति कितना असंवेदनशील है। इसका उदाहरण बनी है जिले के बाड़ेछीना कस्बे में सात वर्ष पहले स्थापित देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की खंडित मूर्ति। पं. नेहरू की इस मूर्ति के सिर का हिस्सा एक साल से टूटा हुआ है लेकिन इसे दुरुस्त करने की ओर किसी का ध्यान नहीं है। यह मामला महज एक टूटी मूर्ति के सुधारीकरण का नहीं अपितु महापुरुषों के अपमान का भी है।
अल्मोड़ा तहसील के बाड़ेछीना कस्बे में 13 फरवरी 2005 में नेहरू युवा केंद्र संगठन के तत्कालीन मंडल निदेशक डीएन आर्या ने देश के पहले प्रधानमंत्री रहे पंडित जवाहर लाल नेहरू की मूर्ति का अनावरण किया। एनवाईके का मूर्ति स्थापित करने का मकसद भले ही पंडित नेहरू के व्यक्तित्व से समाज को प्रेरणा देने का रहा होगा लेकिन आज जिस अवस्था में नेहरू जी की मूर्ति है वह शर्मसार करने वाली है। कस्बे में स्थापित मूर्ति का सिर एक साल से धड़ विहीन है। इस मार्ग से आए दिन कांग्रेस समेत अन्य दलों के नेता, मंत्री, अधिकारी आवाजाही करते हैं लेकिन किसी ने भी इस मूर्ति को ठीक कराने की पहल नहीं की। बेवजह की टिप्पणी और बयानबाजी से एक दूसरे को नीचा दिखाने वाले राजनैतिक दलों के नेताओं के लिए भले ही यह टूटी मूर्ति से अधिक कुछ नहीं हो, परंतु आम नागरिक इसे महापुरुषों के अपमान का मामला मानते हैं।