अल्मोड़ा। जिले में अति कुपोषण की समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है। इसका सीधा असर नौनिहालों की सेहत पर पड़ रहा है। बाल विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार बीते तीन सालों में जिले में 92 बच्चों को अति कुपोषित की श्रेणी में चिन्हित किए गए हैं। इन बच्चों की नियमित निगरानी की जा रही है।
जिले में बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग और बाल विकास परियोजना की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसके तहत स्वास्थ्य शिविरों और जनजागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन भी समय-समय पर किया जा रहा है। बावजूद इसके कुपोषण की जड़ तक पहुंचने और उसे खत्म करने में अब तक कामयाबी नहीं मिल पाई है। खासकर दूरस्थ गांवों की महिलाएं हर माह गर्भावस्था और बच्चों की जांच के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों और अस्पतालों का रुख जरूर करती हैं, फिर भी अति कुपोषित बच्चों का जन्म होना चिंता का विषय बना हुआ है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अति कुपोषित बच्चों को चिकित्सकीय देखरेख में रखा जाता है। इसके साथ ही माताओं को भी पोषण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
जिले में आरबीएसके की टीम बच्चों पर विशेष निगरानी रख रही है। उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधा दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। - डॉ. नवीन तिवारी सीएमओ अल्मोड़ा
- बच्चों की समय-समय पर मॉनिटरिंग की जाती है। वजन और उन्हें पौष्टिक आहार भी दिया जा रहा है। लोगों को इस संबंध में जागरूक भी किया जा रहा है। - पीतांबर प्रसाद, बाल विकास अधिकारी, अल्मोड़ा