रानीखेत (अल्मोड़ा)। नगर के समीपवर्ती चिलियानौला कस्बे में 115 साल पहले शुरू हुआ शिवरात्रि मेला आज भी परंपरा को बचाए हुए है। शिवरात्रि मेले में पूर्व में कपीना, सौनी, ताड़ीखेत, रानीखेत, मवड़ा, गवड़ा, कारचूली, पंतकोटली, सिलोर से हजारों की संख्या में लोग मेला देखने पहुंचते थे।
12 जोड़ी नगाड़े, निशानों के साथ श्रंकार नृत्य आकर्षण का केंद्र था। नगाड़े, निशान लेकर लोग एक दिन पूर्व चिलियानौला आ जाते थे। उस समय गांवों में बाजारों का अभाव था, मेले में छोटी- छोटी शृंगार और खाद्य सामग्रियों की दुकानें सजती थीं। 1939 में स्व. तेज सिंह पधान, बुद्धि बल्लभ जोशी, परमानंद जोशी के प्रयासों से शिव मंदिर की स्थापना हुई। इसके बाद मेला और अधिक भव्य रूप से मनाया जाने लगा। इस मेले को मिनी स्याल्दे बिखोती मेले के रूप में जाना जाता था। हालांकि चिलियानौला में आज भी शिवरात्रि का मेला लगता है, लेकिन नगाड़े निशानों की संख्या घटकर एक जोड़ा रह गई है। बधांण गांव के ग्रामीण अब हैड़ाखान मंदिर से नगाड़े निशानों के साथ बाजार में प्रवेश करते हैं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम मची रहती है। युवा पीढ़ी को यह मेला आज भी प्राचीन संस्कृति की याद दिलाता है।
कैड़ारौ और गगास घाटी में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम
द्वाराहाट। कैड़ारो घाटी की तरफ से आयोजित महाशिव रात्रि महोत्सव में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। मार्कंडेश्वर महादेव मंदिर पारकोट बिंता में कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि विधायक महेश नेगी ने किया। कार्यक्रम मेें नैनीताल और चौखुटिया की सांस्कृतिक कलाकारों ने शानदार कार्यक्रम प्रस्तुत किए। उधर पिंडेश्वर महादेव मंदिर गगास में भी तमाम कार्यक्रम हुए। बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता मेें खुशी जोशी, दिनेश सिंह व काजल रावत, सुलेख में खुशी जोशी, हर्षिता बिष्ट व हर्षिता तिवारी, सामान्य ज्ञान में हर्षित व अर्पिता, चित्रकला जूनियर वर्ग में रचना जोशी, शिवानी तिवारी व भावना तिवारी, सुलेख जूनियर में सुनीता, करन जोशी व पल्लवी भट्ट और सामान्य ज्ञान जूनियर वर्ग में करन जोशी, भावना व करन क्रमश: प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पर रहे। सांस्कृतिक निदेशालय देहरादून की टीम के कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए। इस दौरान संरक्षक ब्रांज फैक्ट्री के महाप्रबंधक एलएम पांडेय, घनश्याम भट्ट आदि थे।
चौलाई के लड्डूओं को लेकर लोगों में रहा उत्साह
रानीखेत। शिवमात्रि मेले के लिए दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से लोग चुआ चौलाई से बने लड्डू बेचने पहुंचे थे। किलकोट, पंतकोटुली के लोगों की संख्या अधिक थी। लड्डू बेचने चिलियानौला पहुंची वलना की कमला पंत और गोविंदी देवी ने बताया कि परिवार का पैतृक धंधा ही लड्डू बेचना रहा है। वह बताते हैं लड्डू बनाने के लिए चौलाई खरीदकर रातभर उसके लड्डू तैयार किए जाते हैं।