भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। स्याल्दे तहसील बनने के पांच साल बाद भी स्याल्दे में स्थायी तहसीलदार, नायब तहसीलदार की तैनाती सरकार नहीं कर पाई है। विकासखंड के पुराने सभागार में ही तहसील कार्यालय बनाकर 20 राजस्व क्षेत्रों का कामकाज संचालित हो रहा है।
क्षेत्रवासियों की लंबे समय से चली आ रही तहसील की मांग पर सात जनवरी 2013 को तत्कालीन मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि कृषि मंत्री हरक सिंह रावत ने स्याल्दे के चौकौट महोत्सव में स्याल्दे को नई तहसील बनाए जाने की घोषणा की। 19 अगस्त 2014 से तहसील अस्तित्व में आई पर तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व लेखाकार के पद नहीं भरे जा सके हैं। आउटसोर्सिंग से चतुर्थ श्रेणी का पद भी नहीं भरा जा सका है। तहसील में प्रभारियों के भरोसे काम चल रहा है।
राज्य बनने से पूर्व भिकियासैंण तहसील का गठन उत्तर प्रदेश सरकार ने 1985 में किया। राज्य बनने के बाद द्वाराहाट, चौखुटिया ,सल्ट तहसीलें बनीं। जिससे स्याल्दे के ग्रामीणों को भी तहसील बनने की आस जगी और लोगों ने सामाजिक कार्यकर्ता हृदेश मेहरा के नेतृत्व में इसकेे लिए आंदोलन किए।
सरकार ने 15 राजस्व क्षेत्रों को मिलाकर स्याल्दे तहसील की घोषणा की। इसके बाद गाजर, गुमटी, घनयाल, चकरगांव, बिसराखेत राजस्व क्षेत्रों को इसमें शामिल करने की मांग भी क्षेत्र के ग्रामीणों द्वारा उठाई गई। जिसको सरकार ने स्याल्दे तहसील में मिलाने की सैद्धांतिक मंजूरी दी जिससे अब तहसील में 20 राजस्व क्षेत्र हैं लेकिन आज भी ग्रामीणों को तहसील का अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है।