सोमेश्वर (अल्मोड़ा)। ग्रामीण इलाकों में कस्बों की आबादी बढ़ रही है, लेकिन कस्बों को व्यवस्थित बसाने के लिए कोई नीति नहीं बन सकी है। सुविधाएं नहीं हैं। सोमेश्वर कस्बा भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। स्ट्रीट लाइट, सफाई, पानी निकासी, शौचालय, पार्किंग के अभाव में व्यापारियों के साथ ही लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सोमेश्वर कस्बे में करीब 350 दुकानें हैं। यह जिले का प्रमुख कस्बा है। यहां से होकर बागेश्वर, अल्मोड़ा, रानीखेत, द्वाराहाट, चौखुटिया आदि स्थानों को प्रतिदिन सैकड़ों वाहन आते जाते हैं। क्षेत्र के दर्जनों गांवों का सोमेश्वर कस्बा प्रमुख बाजार भी है। यहां ऐतिहासिक शिव मंदिर भी है लेकिन कस्बा सुविधाओं से वंचित चल रहा है। कस्बे में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं है। सफाई न होने से कई जगह कूड़ा पड़ा रहता है। कूड़ा निस्तारण के लिए स्थान निश्चित नहीं है। कूड़ा कोसी, सांई नदी के किनारे डाला जाता है। पानी के निकासी के लिए नालियां नहीं बनी हैं। पार्किंग की भी व्यवस्था नहीं है। वाहन आड़े-तिरछे खड़े रहने से जाम की समस्या आम है। एकमात्र शौचालय नाकाफी है। यहां नए शौचालय बनाने की जरूरत है। सुविधाओं के अभाव में व्यापारियों, स्थानीय निवासियों, राहगीरों, यात्रियों को परेशानी होती है।
कस्बे में सुविधाओं के विकास की मांग की जाती रही है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। जिला पंचायत द्वारा शुल्क वसूला जाता है, लेकिन सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं।
कैलाश चंद्र जोशी, व्यापार मंडल कोषाध्यक्ष।
बंदर, सुअरों का आतंक है। स्ट्रीट लाइट की कोई व्यवस्था नहीं है। विद्यालयों के आसपास सड़क पर स्पीड ब्रेकर न होने से खतरा बना रहता है, लेकिन इस ओर शासन, प्रशासन का ध्यान नहीं है।
संतोष कुमार, ग्राम प्रधान।
कस्बे की नियमित सफाई नहीं होती है। कूड़ा साईं, कोसी नदी में डाला जा रहा है। पार्किंग की सुविधा भी नहीं है। इस कारण जाम की समस्या बनी रहती है और पैदल चलने वालों को खतरा बना रहता है।
शिवेंद्र बोरा, व्यापारी।
बाहरी लोगों का सत्यापन नहीं किया जा रहा है। बाजार क्षेत्र में शौचालयों का अभाव है। बाहरी लोग शौच के लिए कोसी, सांई नदियों में जाते हैं, जिससे नदी का पानी भी प्रदूषित होता है। सोमेश्वर को नगर पंचायत का दर्जा दिया जाना चाहिए।
कैलाश बोरा, व्यापारी।